हैदराबाद , मई 30 -- रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र के अग्रणी विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भविष्य के संघर्ष अंतरिक्ष में होने हैं और उस दौर में भारत को वैश्विक नेता के रूप में उभरना है तो अपने उपग्रह समूहों, प्रक्षेपण क्षमताओं और अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को तत्काल बढ़ाना होगा।
इसरो, डीआरडीओ और भारतीय वायुसेना के पूर्व प्रमुखों ने राष्ट्रीय संगोष्ठी में भाग लेते हुए शुक्रवार शाम दावा किया कि भारत के पास तकनीक की कमी नहीं, बल्कि क्षमता की कमी है। उन्होंने देश की रणनीतिक अंतरिक्ष क्षमताओं को मजबूत करने के लिए अधिक रॉकेटों, बड़े उपग्रह नेटवर्क और नीतिगत सुधारों की मांग की।
इसरो के पूर्व अध्यक्ष एएस किरण कुमार ने कहा कि भारत चंद्रयान, मंगलयान और आदित्य-एल1 जैसे अभियानों के माध्यम से अपनी तकनीकी क्षमता पहले ही साबित कर चुका है, लेकिन अब उसे बड़े उपग्रह समूहों और एक मजबूत प्रक्षेपण शृंखला के माध्यम से क्षमता निर्माण करने की आवश्यकता है।
डीआरडीओ के पूर्व अध्यक्ष जी. सतीश रेड्डी ने कहा कि अंतरिक्ष युद्ध का चौथा आयाम बन चुका है और उन्होंने सरकारी एजेंसियों व निजी उद्योग के बीच अधिक मजबूत सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
पूर्व एयर चीफ मार्शल विवेक राम चौधरी ने कहा कि सूचना का वर्चस्व उतना ही महत्वपूर्ण होता जा रहा है, जितनी पारंपरिक मारक क्षमता। उन्होंने चेतावनी दी कि संघर्ष के दौरान उपग्रह क्षमताओं को तेजी से बहाल करने की योग्यता भविष्य के युद्धों में निर्णायक साबित हो सकती है।
इस चर्चा की शुरुआत संगोष्ठी के संस्थापक गिरीश मालपानी के उठाये गये सवाल 'भारत अपना खुद का स्टारलिंक क्यों नहीं बना सकता?' से हुई, जिसने प्रतिभागियों को स्वदेशी उपग्रह संचार नेटवर्क के त्वरित विकास और अधिक रणनीतिक आत्मनिर्भरता की मांग करने के लिए प्रेरित किया।
उद्योग जगत के नेताओं ने खरीद सुधारों और पूंजी तक पहुंच बढ़ाने का भी आग्रह किया। उन्होंने ध्यान दिलाया कि अमेरिका और यूरोप में रक्षा व नागरिक अंतरिक्ष खरीद का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा निजी उद्योग के माध्यम से संचालित होता है।
इस संगोष्ठी का मुख्य संदेश यह था कि भारत अंतरिक्ष में विश्व स्तरीय तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन तो पहले ही कर चुका है, लेकिन अब उसे बड़े पैमाने (स्केल), पूंजी और नीति से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करना होगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि 'भारत का आसमान कभी अंधकारमय न हो' और देश खुद को एक वैश्विक अंतरिक्ष महाशक्ति के रूप में स्थापित कर सके।
इस पैनल चर्चा का संचालन इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के पूर्व डिप्टी चीफ लेफ्टिनेंट जनरल पीजेएस पन्नू ने किया, जिन्होंने भारत की डिफेंस स्पेस एजेंसी, डिफेंस साइबर एजेंसी और आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल ऑपरेशंस डिवीजन की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी।
केवल आमंत्रित अतिथियों के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में रक्षा, एयरोस्पेस, स्टार्टअप, शिक्षा जगत, अनुसंधान और सार्वजनिक नीति से जुड़े 100 से अधिक मेहमानों ने हिस्सा लिया।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित