कोलकाता , मार्च 25 -- पश्चिम बंगाल की हाई-प्रोफाइल भवानीपुर विधानसभा सीट पर रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) की नियुक्ति को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का मुकाबला विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी से होना है।
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने नंदीग्राम के ब्लॉक विकास अधिकारी सुरजीत रॉय को भवानीपुर का आरओ बनाए जाने पर आपत्ति जताई है। पार्टी ने इस संबंध में दिल्ली स्थित मुख्य चुनाव अधिकारी को पत्र लिखा है, जिसकी प्रति पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल को भी भेजी गई है। पत्र में अधिकारी की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए हैं।
मामला तब और तूल पकड़ गया जब सुश्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को उत्तर बंगाल रवाना होने से पहले चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया, "आयोग की अधिसूचना पर भाजपा का प्रतीक चिन्ह है! चुनाव आयोग किसके निर्देश पर काम कर रहा है? नंदीग्राम के बीडीओ को भवानीपुर लाया जा रहा है। यह पीछे के दरवाजे से खेल क्यों हो रहा है?"इसके तुरंत बाद टीएमसी के राज्यसभा नेता डेरेक ओ'ब्रायन ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर कहा कि भवानीपुर एक संवेदनशील सीट है और निष्पक्ष एवं स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित करने में आरओ की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।
पार्टी ने श्री सुरजीत रॉय के पिछले आचरण को लेकर गंभीर चिंता जताई और उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए। पत्र में कहा गया कि वह पहले नंदीग्राम-2 ब्लॉक में बीडीओ रह चुके हैं, जहां उनकी भूमिका और कथित राजनीतिक झुकाव पर सवाल उठे थे।
सत्तारूढ़ दल ने यह भी दावा किया कि श्री रॉय की श्री सुवेंदु अधिकारी से नजदीकी के आरोप रहे हैं, जो इस समय भवानीपुर से चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे यह नियुक्ति और विवादित हो गई है।
टीएमसी का कहना है कि ऐसे अधिकारी को आरओ बनाए रखना चुनाव प्रक्रिया में जनता के भरोसे को कमजोर कर सकता है। पार्टी ने चुनाव आयोग से मांग की है कि श्री सुरजीत रॉय को तुरंत हटाया जाए और उनकी जगह किसी निष्पक्ष अधिकारी की नियुक्ति की जाए।
इसके अलावा, पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि परंपरा के अनुसार ऐसे पदों पर आमतौर पर संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारियों की नियुक्ति होती है, लेकिन इस मामले में उस मानक का पालन नहीं किया गया।
टीएमसी ने आयोग के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं हैं जिनमें श्री सुरजीत रॉय को तुरंत हटाने; भवानीपुर के लिए निष्पक्ष अधिकारी की नई नियुक्ति करने और भविष्य में ऐसी नियुक्तियों में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने की बात कही गयी है।
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