रांची , अगस्त 21 -- झारखंड में जेएसएससी-सीजीएल समेत विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो ने शुक्रवार को राज्य सरकार की मंशा पर कई गंभीर सवाल उठाए।

श्री महतो ने आज यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि छात्रों के आंदोलन के दबाव में सरकार ने 17 अगस्त को 22 परीक्षाओं को रद्द करने और 23 परीक्षाओं की जांच कराने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि जेपीएससी, एफएसओ, सीडीपीओ और जेएसएससी-सीजीएल समेत कई परीक्षाओं से जुड़े मामले न्यायालय तक पहुंचे हैं।

सरकार ने सीआईडी जांच रिपोर्ट और सामने आई कथित गड़बड़ियों के आधार पर परीक्षाएं रद्द करने की कार्रवाई की। लेकिन जब हाईकोर्ट में सरकार को अपना पक्ष मजबूती से रखने का अवसर मिला, तब सीआईडी की जांच रिपोर्ट को प्रभावी तरीके से अदालत के समक्ष क्यों नहीं रखा गया, यह बड़ा सवाल है।

श्री महतो ने कहा कि इस पूरे मामले से झारखंड के छात्र और आम लोग आहत हैं। छात्रों को उम्मीद थी कि परीक्षाओं को लेकर हुई कार्रवाई के बाद राज्य की भर्ती व्यवस्था में सुधार होगा और भविष्य में पेपर लीक तथा परीक्षा में धांधली पर रोक लगेगी।

श्री महतो ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन किसी निर्दोष छात्र की नौकरी छीनने के लिए नहीं है। सरकार को उन छात्रों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए, जो निर्दोष हैं और जिनका चयन हुआ है। दोषियों पर कार्रवाई के साथ निर्दोष अभ्यर्थियों के भविष्य की भी रक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य भ्रष्टाचार, धांधली और अनियमितताओं के खिलाफ लड़ाई लड़ना है।

श्री महतो ने बताया कि भर्ती व्यवस्था में सुधार को लेकर अभियान की शुरुआत दो जुलाई से हुई थी। पांच जुलाई से आंदोलन, 25 जुलाई से सत्याग्रह और दो अगस्त से भूख हड़ताल शुरू की गई। अब आंदोलन के अगले चरण में 'भर्ती सुधार यात्रा' निकाली जाएगी। उन्होंने घोषणा की कि 24 अगस्त से शिबू सोरेन के पैतृक गांव नेमरा से यात्रा शुरू होगी। इस दौरान राज्य के विभिन्न जिलों में छात्रों, शिक्षकों, प्रोफेसरों और आम लोगों के बीच भर्ती व्यवस्था को लेकर जनजागरण अभियान चलाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को यह गारंटी देनी होगी कि भविष्य में झारखंड में पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया में धांधली नहीं होगी। यदि 45 परीक्षाओं पर सीआईडी जांच के आधार पर कार्रवाई हुई है और उनमें गड़बड़ियां सामने आई हैं, तो दोषियों के खिलाफ भी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। नगरपालिका, लॉ असिस्टेंट, हेड वर्कर, सहायक पुलिस समेत अन्य परीक्षाओं से जुड़े मामलों को भी आंदोलन में प्रमुखता से उठाया जाएगा।

श्री महतो ने चेतावनी दी कि आगामी न्यायालय की सुनवाई में यदि सरकार ने अपना पक्ष मजबूती से नहीं रखा, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री आवास घेराव, चक्का जाम और जरूरत पड़ने पर अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी दी।

उन्होंने कहा कि पिछले 26 वर्षों से झारखंड की भर्ती व्यवस्था को लेकर छात्रों के साथ छल और अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती रही हैं। मौजूदा आंदोलन का उद्देश्य केवल परीक्षाएं रद्द कराना नहीं, बल्कि ऐसी पारदर्शी भर्ती व्यवस्था तैयार कराना है, जिसमें भविष्य में पेपर लीक, धांधली और भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश न रहे।

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