लखनऊ , फरवरी 10 -- उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मंगलवार को विधान परिषद में 2026-27 के बजट सत्र के दौरान स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश सरकार सरकारी सेवाओं में आरक्षण संबंधी प्रावधानों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराने के अपने संकल्प पर पूरी तरह दृढ़ है।
उन्होंने कहा कि आरक्षण नीति को लेकर किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति नहीं है और सभी भर्तियां नियमों के अनुरूप पारदर्शी ढंग से की जाएंगी। उप मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि प्रदेश में सरकारी सेवाओं में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत, अनुसूचित जाति के लिए 21 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति के लिए 2 प्रतिशत तथा सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 40 प्रतिशत अनारक्षित श्रेणी किसी एक वर्ग के लिए आरक्षित नहीं है, बल्कि आरक्षित वर्ग का कोई भी पात्र अभ्यर्थी अनारक्षित श्रेणी में भी चयनित हो सकता है।
केशव प्रसाद मौर्य ने बताया कि सभी सरकारी भर्तियों में आरक्षण नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए कार्मिक विभाग द्वारा 30 दिसंबर 2025 को शासनादेश जारी किया जा चुका है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप हो।
उन्होंने 7,994 लेखपाल पदों की भर्ती का उदाहरण देते हुए बताया कि विज्ञापन में हुई त्रुटि को सुधारते हुए आरक्षण का विस्तृत विवरण स्पष्ट किया गया है। इनमें 3,205 पद अनारक्षित, 1,679 अनुसूचित जाति, 160 अनुसूचित जनजाति, 2,158 अन्य पिछड़ा वर्ग तथा 792 पद आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लिए निर्धारित किए गए हैं।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार भर्ती माफिया पर सख्ती से कार्रवाई करने, पारदर्शी भर्ती प्रणाली लागू करने और आरक्षण व्यवस्था को पूरी ईमानदारी के साथ लागू कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने दोहराया कि आरक्षण हर हाल में संविधान और नियमों के अनुरूप सुनिश्चित किया जाएगा।
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