भदोही , अक्टूबर 31 -- उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में तीज, त्योहारहारों और मांगलिक कार्यक्रमों के दौरान दुग्ध उत्पादों की बढ़ती मांग के बीच मिलावट का खतरा बढ़ गया है। उत्पादन के सापेक्ष दूध की दुगुनी मांग के कारण दूसरे जिलों से आने वाले उत्पादों के साथ मिलावटी खाद्य पदार्थों की आपूर्ति की आशंका जताई जा रही है।
जिला पशु चिकित्साधिकारी डा. एके सचान ने बताया कि जिले में करीब 65 हजार दुधारू पशु हैं, जिनसे प्रतिदिन लगभग 3.50 लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है। जिले की आबादी करीब 20 लाख है। दूध की जरूरत पूरी करने के लिए लोगों को स्थानीय उत्पादन के अलावा डेयरी और विभिन्न कंपनियों के दूध पर निर्भर रहना पड़ता है।
उन्होने बताया कि जिले में पनीर और खोवा की आपूर्ति मुख्य रूप से वाराणसी और मिर्जापुर से होती है। जिले में पनीर और खोवा की कोई बड़ी मंडी अथवा खोवा उत्पादन इकाई नहीं है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जिले में प्रतिदिन करीब 10-10 टन पनीर और खोवा का उत्पादन होता है।
खाद्य विभाग के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि त्योहारों के दौरान खाद्य पदार्थों की मांग में तेजी से वृद्धि होती है। विशेषकर दीपावली पर मिठाइयों की खपत तीन से चार गुना तक बढ़ जाती है। इसके चलते दूध की जरूरत भी सामान्य दिनों की तुलना में पांच से छह प्रतिशत तक बढ़ जाती है।
स्थानीय स्तर पर मांग और उत्पादन के बीच अंतर का फायदा उठाकर मिलावटखोर सक्रिय हो जाते हैं। दूध, पनीर और खोवा में मिलावट से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर विशेष चिंता जताई जा रही है।
त्योहारों के मद्देनजर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए बाजार में बिक रहे दूध, पनीर और खोवा की नियमित जांच की जरूरत महसूस की जा रही है।
हालांकि इस त्योहारी सीजन में मिलावटखोरी के विरुद्ध स्थानीय प्रशासन द्वारा कठोर कदम उठाए गए हैं। लगभग तीन दर्जन दुकानों पर छापा मारकर सेंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। जिला प्रशासन की ताबड़तोड़ कार्यवाही से मिलावटखोरों में दहशत का माहौल है।
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