भदोही , मार्च 24 -- उत्तर प्रदेश के भदोही में विश्व क्षय दिवस के अवसर पर जहां टीबी उन्मूलन के प्रयास तेज किए जा रहे हैं, वहीं कालीन उद्योग से जुड़े वाशिंग और डाइंग प्लांटों के रसायन युक्त जल प्रदूषण को इस बीमारी के बढ़ते मामलों का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में वर्तमान में 1732 क्षय रोग के मरीजों का इलाज सरकारी अस्पतालों में चल रहा है। हालांकि निजी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों को शामिल किया जाए तो यह संख्या कहीं अधिक हो सकती है।
जिले में टीबी उन्मूलन के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। मरीजों को निःशुल्क जांच और दवा उपलब्ध कराई जा रही है। महाराजा चेतसिंह जिला अस्पताल सहित सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी उपचार की व्यवस्था की गई है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष कुमार चक ने बताया कि जिले के 229 गांवों को टीबी मुक्त बनाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले वित्तीय वर्ष में भी 350 से अधिक गांवों को टीबी मुक्त घोषित किया गया था। विशेषज्ञों के अनुसार, कालीन नगरी में डाइंग और वाशिंग प्लांटों से निकलने वाला रसायन युक्त पानी भूगर्भ में मिलकर पेयजल को दूषित कर रहा है, जिससे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। जल, वायु और ध्वनि प्रदूषण को टीबी के बढ़ते मामलों का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।
प्रशासन और समाजसेवियों द्वारा मरीजों को पोषण पोटली वितरित कर उनके उपचार में सहयोग किया जा रहा है, वहीं जिले को टीबी मुक्त बनाने के लिए जागरूकता अभियान भी लगातार चलाए जा रहे हैं।
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