भदोही , जुलाई 30 -- उत्तर प्रदेश के भदोही जिले का नाम एक बार फिर "संत रविदास नगर" किए जाने की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा के बाद जिले में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जहां एक वर्ग इस निर्णय को संत रविदास के सम्मान और सांस्कृतिक विरासत से जोड़कर स्वागत कर रहा है, वहीं कालीन उद्योग से जुड़े लोग इसे जिले की वैश्विक पहचान पर प्रभाव डालने वाला कदम मान रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर वाराणसी के सीर गोवर्धनपुर स्थित श्री गुरु रविदास मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में भदोही जनपद का नाम पुनः "संत रविदास नगर" करने की घोषणा की। इसके बाद जिले के नाम परिवर्तन का इतिहास एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
विश्व प्रसिद्ध हस्तनिर्मित कालीन उद्योग के लिए पहचान रखने वाला यह क्षेत्र पहले वाराणसी जनपद का हिस्सा था। प्रशासनिक सुविधा और क्षेत्रीय विकास को ध्यान में रखते हुए 30 जून 1994 को इसे अलग जनपद का दर्जा दिया गया। जिले का मुख्यालय ज्ञानपुर बनाया गया, जबकि भदोही नगर पहले से ही कालीन उद्योग के कारण अंतरराष्ट्रीय पहचान रखता था।
जिले के गठन के लगभग तीन वर्ष बाद 4 दिसंबर 1997 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती के नेतृत्व वाली सरकार ने संत गुरु रविदास के सम्मान में जिले का नाम बदलकर "संत रविदास नगर" कर दिया था। इसके बाद कई वर्षों तक सरकारी अभिलेखों और प्रशासनिक कार्यों में इसी नाम का प्रयोग होता रहा।
हालांकि, नाम परिवर्तन के बाद कालीन निर्यातकों ने आशंका जताई थी कि इससे विश्व बाजार में "भदोही कारपेट" की स्थापित पहचान प्रभावित होगी। निर्यातकों के विरोध के बाद 6 दिसंबर 2014 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरकार ने कैबिनेट के निर्णय से जिले का नाम पुनः "भदोही" कर दिया। तब से सरकारी अभिलेखों में भदोही नाम का उपयोग किया जा रहा था, हालांकि आम बोलचाल में संत रविदास नगर नाम भी प्रचलित रहा।
अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संत गुरु रविदास की 650वीं जयंती के अवसर पर जिले का नाम फिर से "संत रविदास नगर" करने की घोषणा करते हुए कहा कि संत रविदास के समानता, सामाजिक समरसता और मानवता के संदेश का सम्मान करना सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद जिले में इस निर्णय को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। अनेक सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों और स्थानीय नागरिकों ने इसे सांस्कृतिक विरासत और जनभावनाओं के सम्मान का प्रतीक बताया है। वहीं कालीन उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि नाम परिवर्तन से विश्व बाजार में "भदोही कारपेट" ब्रांड की पहचान प्रभावित हो सकती है।
कालीन निर्यातक मुशीर इकबाल ने कहा कि मुख्यमंत्री का यह निर्णय कालीन कारोबार के लिए चुनौतियां उत्पन्न कर सकता है, जबकि अन्य लोगों का मानना है कि जिले का नाम एक महान संत के नाम पर होना सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से गौरव का विषय है।
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