भदोही , जुलाई 31 -- उत्तर प्रदेश में भदोही जिले का नाम बदलकर दूसरी बार संत रविदास नगर किए जाने का विरोध शुरू हो गया है। शुक्रवार को जनता दल (यू) के जिलाध्यक्ष सर्वेश राय ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपते हुए जनपद का नाम यथावत भदोही ही रखने की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि भदोही पहले वाराणसी जनपद का हिस्सा था। 30 जून 1994 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में इसे उत्तर प्रदेश का 65वां जिला बनाया गया। इसके बाद वर्ष 1997 में तत्कालीन बसपा सरकार ने जिले का नाम बदलकर संत रविदास नगर कर दिया था। हालांकि वर्ष 1999 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रामप्रकाश गुप्ता ने जिले के नाम में भदोही भी जोड़ दिया, क्योंकि देश और दुनिया में भदोही की पहचान उसके विश्व प्रसिद्ध कालीन उद्योग से है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि भदोही के हस्तनिर्मित कालीनों को भौगोलिक संकेतक (जीआई टैग) प्राप्त है और यह जिला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। कालीन उद्योग और निर्यात के कारण ही भदोही को अलग जिला बनाए जाने का निर्णय लिया गया था। बाद में वर्ष 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरकार ने जिले का नाम पुनः भदोही कर दिया।
जनता दल (यू) ने कहा कि 29 जुलाई को प्रदेश सरकार द्वारा फिर से जिले का नाम संत रविदास नगर किए जाने का निर्णय लिया गया है, जबकि संत रविदास का जन्म वाराणसी में हुआ था, भदोही जिले से उनका कोई संबंध नहीं है। पार्टी का कहना है कि भदोही नाम से जिले की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और औद्योगिक पहचान जुड़ी हुई है, इसलिए इसे बदला जाना उचित नहीं है। ज्ञापन के माध्यम से राज्यपाल से मांग की गई कि जनभावनाओं और जिले की वैश्विक पहचान को ध्यान में रखते हुए जनपद का नाम भदोही ही यथावत बनाए रखा जाए।
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