जयपुर , जुलाई 16 -- राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने अपने ढाई साल के कार्यकाल में यमुना जल समझौते से रिफाइनरी शुरू करने सहित कई बड़े फैसलों से प्रदेश के विकास की तस्वीर बदलने लगी है।

बत्तीस साल पुराने यमुना जल समझौते को लागू कराने से लेकर राम जल सेतु लिंक परियोजना, एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी, पेपर लीक माफिया पर कार्रवाई, रिकॉर्ड निवेश और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने जैसे निर्णय राजस्थान के भविष्य की नींव साबित होंगे। इन फैसलों के जरिए न केवल वर्षों पुराने विवादों का समाधान हुआ बल्कि राजस्थान में नयी जल क्रांति और नयी औद्योगिक क्रांति की नींव भी पड़ी है। इन निर्णयों से लोगों के जीवन में बड़े बदलाव की शुरुआत हुई है और इस फैसलों का असर प्रदेश की राजनीति और विकास दोनों पर देखने को मिल रहा है।

श्री शर्मा का कहना है कि जल प्रबंधन, औद्योगिक विकास, निवेश, ऊर्जा और रोजगार से जुड़े इन फैसलों ने राजस्थान के विकास की नई आधारशिला रखी है। सरकार इन्हें ऐसे निर्णय मान रही है, जिनका असर आने वाले वर्षों में प्रदेश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों के जीवन पर दिखाई देगा।

राज्य सरकार के अनुसार गत 29 जून को राजस्थान और हरियाणा के बीच 32 साल पुराने यमुना जल समझौते को लागू करने के लिए ऐतिहासिक एमओए पर हस्ताक्षर किये गये। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में दोनों राज्यों के बीच समझौता हुआ। सरकार का दावा है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के लगातार प्रयासों से तीन दशक से अधिक समय से लंबित यह मामला सुलझ सका।

इस समझौते के तहत राजस्थान को करीब 57 करोड़ 70 लाख क्यूबिक मीटर (एमसीएम) पानी मिलेगा। इसके लिए लगभग 295 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन बिछाई जाएगी, जिस पर करीब 34 हजार 102 करोड़ रुपए खर्च होंगे। सरकार का कहना है कि इस परियोजना से शेखावाटी सहित जल संकट से जूझ रहे इलाकों को बड़ी राहत मिलेगी।

पूर्वी राजस्थान की महत्वाकांक्षी पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) को नया स्वरूप देते हुए सरकार ने इसे राम जल सेतु लिंक परियोजना के रूप में आगे बढ़ाया। मुख्यमंत्री ने इस परियोजना को प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण जल योजनाओं में शामिल किया है। करीब 91 हजार 700 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना से 17 जिलों के करीब तीन करोड़ लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही लगभग 4 लाख 84 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार का दावा है कि इससे पूर्वी राजस्थान में जल संकट दूर होगा और कृषि के साथ औद्योगिक विकास को भी गति मिलेगी।

गत चार जुलाई को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बालोतरा जिले के पचपदरा स्थित एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी एवं पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन किया। करीब 79 हजार 459 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना को प्रदेश के औद्योगिक विकास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल किया जा रहा है।

सरकार का कहना है कि रिफाइनरी शुरू होने से पश्चिमी राजस्थान पेट्रोकेमिकल उद्योग का बड़ा केंद्र बनेगा। इससे पेट्रोकेमिकल, प्लास्टिक, कपड़ा और रासायनिक उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे और राज्य के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी।

भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार ने पेपर लीक के मामलों में सख्त कार्रवाई का उनके नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है। जांच के लिए स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) को जिम्मेदारी दी गयी। सरकार के अनुसार, पिछली सरकार के दौरान हुए पेपर लीक मामलों में अब तक 527 से अधिक आरोपियों और माफियाओं को गिरफ्तार किया जा चुका है।

इसके अलावा नकल और पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून लागू किया गया है और एंटी गैंग टास्क फोर्स का गठन भी किया गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा कई बार कह चुके हैं कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

सरकार का दावा है कि राजस्थान निवेशकों की पहली पसंद बनकर उभरा है। 'राइजिंग राजस्थान' ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट के दौरान राज्य को 35 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। सरकार के मुताबिक निवेश के मामले में राजस्थान देश में आठवें स्थान से तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।

राज्य सरकार ने अगले पांच वर्षों में राजस्थान को 350 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य तय किया है। इसी दिशा में राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना (आरआईपीएस-2024) लागू की गयी है, ताकि निवेशकों को बेहतर माहौल और उद्योगों को प्रोत्साहन मिल सके।

राजस्थान पहले से ही देश के अग्रणी सौर ऊर्जा उत्पादक राज्यों में शामिल है। सरकार ने 150 यूनिट प्रतिमाह निःशुल्क बिजली योजना के तहत रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाने वाले उपभोक्ताओं के खातों में 17 हजार रुपए की राज्य सब्सिडी देना शुरू किया है। सरकार का कहना है कि इससे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ेगा, बिजली खर्च कम होगा और प्रदेश ऊर्जा के क्षेत्र में और मजबूत होगा। श्री शर्मा का कहना है कि जल प्रबंधन, औद्योगिक विकास, निवेश, ऊर्जा और रोजगार से जुड़े इन फैसलों ने राजस्थान के विकास की नई आधारशिला रखी है। सरकार इन्हें ऐसे निर्णय मान रही है, जिनका असर आने वाले वर्षों में प्रदेश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों के जीवन पर दिखाई देगा।

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