नयी दिल्ली , मई 91 -- केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को लेह में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को प्रदर्शित करने वाले कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
इस अवसर पर लद्दाख के उपराज्यपाल वी के सक्सेना और केन्द्रीय गृह सचिव सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
गृह मंत्रालय ने बताया कि श्री शाह ने इस अवसर पर कहा कि यह बुद्ध पूर्णिमा लद्दाख के निवासियों के लिए मणिकांचन अवसर है। उन्होंने कहा कि बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर 75 साल बाद भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष यहां आने से बौद्ध धर्म के साथ ही अन्य मतों के अनुयायी इनसे ऊर्जा प्राप्त करेंगे।
उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध की तरह शायद ही किसी के जीवन में ऐसा होगा कि जन्म, ज्ञानप्राप्ति और महापरिनिर्वाण एक ही दिन हुए हों, इसीलिए आज का दिन हम सबके लिए बहुत शुभ और प्रेरणादायक दिन है। आज धर्मिक आयोजन के साथ-साथ एक ऐतिहासिक पुनर्मिलन भी है। इतने साल के बाद इस पवित्र भूमि पर तथागत बुद्ध अपनी सबसे प्रिय भूमि पर लौटे हैं, जो बहुत सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कहा कि लद्दाख सैकड़ों वर्षों से धम्म की जीवंत भूमि रहा है। जब दलाई लामा यहां आते हैं तो वे कहते हैं कि ये भूमि केवल भौगोलिक भूमि नहीं है बल्कि बौद्ध संस्कृति और करुणा की जीवंत प्रयोगशाला है।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि लद्दाख की आध्यात्मिक पहचान चार प्रमुख परंपराओं - न्यिंग्मा, काग्यु, शाक्य और गेलुग - से बनी है। पहली, जो जैसा है उसे वैसा ही देखिए। दूसरी, गुरु की कृपा और निरंतर आत्मचिंतन ही मुक्ति का द्वार है। तीसरी, ज्ञान साधना के बिना अधूरा है और साधना ज्ञान के बिना अंधी होती है इसीलिए ज्ञान और साधना का मिलन ही सही रास्ता है। चौथी, नैतिक अनुशासन नहीं है तो कभी प्रज्ञावान जीवन नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि लद्दाख की भूमि से निकला .यह संदेश आज विश्व के लिए जीवन को आगे ले जाने का कारण बना है।
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