वाराणसी , अप्रैल 30 -- सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के श्रमण विद्या संकाय एवं धर्म संस्कृति संगम के संयुक्त तत्वावधान में बुद्ध जयंती के अवसर पर "धर्म-संस्कृति समन्वय में भगवान बुद्ध का योगदान" विषय पर एक संगोष्ठी आयोजित की गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि भगवान बुद्ध का मध्यम मार्ग वर्तमान विश्व में संतुलन, शांति और सह-अस्तित्व की दिशा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि करुणा, अहिंसा और मध्यम मार्ग के उपदेशों को अपनाकर ही दीर्घकालिक वैश्विक शांति स्थापित की जा सकती है।

मुख्य वक्ता भदन्त डॉ. के. श्री सुमेध महाथेरो ने कहा कि करुणा, मैत्री और प्रज्ञा मानव जीवन को सार्थक बनाते हैं। उन्होंने बुद्ध को "एशिया का प्रकाश" बताते हुए कहा कि बौद्ध धर्म भारतीय संस्कृति का प्रथम वैश्विक दूत है, जिसने करुणा और अहिंसा की शिक्षाओं को विश्वभर में फैलाया।

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