नयी दिल्ली , अक्टूबर 23 -- भारत के वैज्ञानिकों की एक टीम ने तेजी से घूमने वाले ब्लैक होल के आसपास के पदार्थ से अत्यधिक दोलन करने वाले एक्स-रे के उत्सर्जन के की प्रणाली का पता लगाया है। ब्लैक होल के आसपास के पदार्थ को एक्रिशन डिस्क (जमा पदर्थ की तस्तरी) भी कहा जाता है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की शुक्रवार को जारी एक विज्ञप्ति के मुताबिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त संस्थान, आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज (एआरआईईएस) के वैज्ञानिकों ने यह समझाने का काम किया कि कैसे एक अपनी धुरी पर घूमने वाले ब्लैक होल के चारों ओर अभिवृद्धि झटकों के दोलन आवृत्तियों की इस विस्तृत शृंखला का उत्पादन कर सकता है।

इस अध्ययन में निकोलस कोपरनिकस एस्ट्रोनॉमिकल सेंटर, पोलैंड और एमजेपी रोहिलखंड विश्वविद्यालय, बरेली के वैज्ञानिक भी एआरआईईएस के सनित देबनाथ और डॉ इंद्रनील चट्टोपाध्याय के नेतृत्व में इस काम में शामिल थे।

ब्लैक होल ब्रह्मांड की सबसे कॉम्पैक्ट वस्तु माने जाते हैं और पनी धुरी के चारों ओर घूम सकते हैं। ये बड़े गुरुत्वाकर्षण के साथ प्रकाश को भी बाहर निकलने से रोक देते हैं। अपने मजबूत गुरुत्वाकर्षण द्वारा ब्लैक होल की ओर खींचे गए पदार्थ को एक्रिशन प्रवाह कहा जाता है और यह उच्च गति से अंदर की ओर गिरता है, जिससे गैर-तापीय विकिरण उत्पन्न होता है।

यह विकिरण अक्सर चमक में लगभग नियमित भिन्नता दिखाता है, जिसे क्यूपीओ कहा जाता है। ब्लैक होल एक्स-रे बायनेरिज में, इन दोलनों में एक चक्र प्रति सेकंड से कम से लेकर कई सौ चक्र प्रति सेकंड तक की आवृत्तियां हो सकती हैं।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि पिछले अध्ययन या तो कम आवृत्ति दोलनों की व्याख्या कर सकते थे, या उच्च आवृत्ति दोलनों की व्याख्या करने के लिए अन्य विदेशी प्रक्रिया को लागू करना पड़ा। भारतीय वैज्ञानिकों के दल ने ब्लैक होल के चारों ओर चिपचिपे एक्रिशन प्रवाह के व्यवहार को मॉडल करने के लिए एआरआईईएस में अंकीय एवं सैद्धांतिक एस्ट्रोफिजिक्स ग्रुप द्वारा विकसित एक कंप्यूटर सिमुलेशन का उपयोग किया।

उनके निष्कर्ष हाल ही में जर्नल ऑफ हाई एनर्जी एस्ट्रोफिजिक्स (जेएचईएपी) में प्रकाशित हुए थे। अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि जब एक्रिशन प्रवाह की चिपचिपाहट एक निश्चित महत्वपूर्ण मूल्य से अधिक हो जाती है, तो डिस्क में सामान्य रूप से स्थिर झटका अस्थिर हो जाता है और दोलन करना शुरू कर देता है। एक्रिशन डिस्क में ये दोलन उत्सर्जित विकिरण में नियमित बदलाव उत्पन्न कर सकते हैं, जिसे प्रकाश की लगभग आवधिक झिलमिलाहट के रूप में देखा जाता है, जिसे अर्ध-आवधिक दोलनों (क्यूपीओ) के रूप में जाना जाता है।

अध्ययन से यह भी पता चला है कि ब्लैक होल के स्पिन का झटके की गति और क्यूपीओ की आवृत्ति पर गहरा प्रभाव पड़ता है। धीरे-धीरे घूमने वाले ब्लैक होल में, चिपचिपाहट दोलन झटके की औसत स्थिति को ब्लैक होल से दूर धकेलती है, जिसके परिणामस्वरूप मुख्य रूप से कम आवृत्ति वाले क्यूपीओ होते हैं।

इसके विपरीत, तेजी से घूमने वाले ब्लैक होल झटके को ब्लैक होल के करीब खींचते हैं, जिससे आवृत्तियों की एक विस्तृत शृंखला पर क्यूपीओ पैदा होता है। बहुत अधिक स्पिन वाले ब्लैक होल के लिए अनुमानित क्यूपीओ आवृत्तियां ब्लैक होल के लिए सूर्य के द्रव्यमान का लगभग 10 गुना अधिक हो सकती हैं, जो ब्लैक होल एक्स-रे बाइनरी सिस्टम में देखी गई उच्च-आवृत्ति विविधताओं के समान है।

सिमुलेशन से यह भी पता चलता है कि जैसे-जैसे ब्लैक होल तेजी से घूमता है, झटका ब्लैक होल के करीब जाता है और इसके दोलन अधिक स्पष्ट हो जाते हैं।

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