चेन्नई , जून 03 -- ब्रिटानिया मिल्क बिकिस ब्रांड ने बुधवार को 'थिरुक्कुरल चैलेंज' नाम की एक बेहद अनूठी पहल की शुरुआत की।

इस पहल को इस तरह तैयार किया गया है कि बच्चे खेल-खेल और बेहद दिलचस्प अंदाज में महान तमिल संत एवं कवि थिरुवल्लुवर के अमर दोहों को आसानी से समझ और सीख सकें।

महान कवि और दार्शनिक थिरुवल्लुवर द्वारा 2,000 से भी अधिक वर्ष पहले लिखे गए 'थिरुक्कुरल' में कुल 1,330 कुराल (दोहे) शामिल हैं। यह संग्रह आज भी रोजमर्रा के जीवन, रिश्तों, शिक्षा, नेतृत्व और नैतिक मूल्यों पर कभी न पुराने होने वाले सबक सिखाता है। सदियों पुराना होने के बाद भी इसका ज्ञान आज के दौर में उतना ही प्रासंगिक है तथा इसकी सीख लगातार पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ रही है।

इस अभियान की शुरुआत चेन्नई के 'वल्लुवर कोट्टम' में की गई, जो थिरुवल्लुवर और थिरुक्कुरल की ऐतिहासिक विरासत को समर्पित सबसे प्रतिष्ठित स्मारकों में से एक है। उद्घाटन समारोह में तमिलनाडु के प्रख्यात विद्वानों, कलाकारों और सांस्कृतिक हस्तियों ने सहभागिता की तथा थिरुक्कुरल के शाश्वत मूल्यों और समकालीन समाज में उसकी प्रासंगिकता पर विचार-विमर्श किया। साथ ही इस बात पर भी विचार किया कि आज की युवा पीढ़ी किस तरह की सामग्री (कंटेंट) देखना और सुनना पसंद करती है। विचार-विमर्श में यह बात सामने आई कि नयी पीढ़ी के लिए थिरुक्कुरल को अधिक आकर्षक और प्रभावशाली बनाने के लिए इसके सीखने-सिखाने के तरीकों में बदलाव लाने की जरूरत है।

इस खास परिचर्चा में डॉ. जी. ज्ञानसंबंदन, लिडियन नाधास्वरम, सुकी शिवम और भारती भास्कर जैसी प्रमुख हस्तियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने अपने विचार साझा करते हुए बताया कि थिरुक्कुरल कैसे पीढ़ियों से आगे बढ़ता आ रहा है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि बच्चों को इन महान सीखों से जोड़ने में कहानियों, संगीत और रोजमर्रा की बातचीत की क्या भूमिका हो सकती है, और कैसे आधुनिक व दिलचस्प तरीके युवा पीढ़ी को थिरुक्कुरल को जानने व सीखने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

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