नयी दिल्ली , अक्टूबर 22 -- ब्रिक्स देशों के बारहवें संसदीय मंच का दो दिवसीय आयोजन 26 अक्टूबर से होगा जिसमें भारत के अलावा 10 अन्य सदस्य देशों और 11 आमंत्रित देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरुवार को यहां संसद भवन परिसर में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे और विदेशी शिष्टमंडलों के नेताओं से मुलाकात करेंगे। उन्होंने बताया कि इस बार बैठक में दो सदस्य देश सउदी अरब और इथोपिया हिस्सा नहीं ले पा रहे हैं। बैठक में विभिन्न देशों के पीठासीन अधिकारी, संसद सदस्य तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति संसदों के लिए रणनीतिक प्राथमिकताओं पर मंथन करेंगे।
श्री बिरला ने कहा कि ब्रिक्स संसदीय मंच वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा करने, सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान करने और सरकारों को दिशा देने में संसदीय सहयोग की भूमिका मजबूत करने का अवसर है। उन्होंने उम्मीद जताई कि विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से संयुक्त घोषणा-पत्र जारी किया जाएगा। उन्होंने ब्राजील में आयोजित 11वें ब्रिक्स संसदीय मंच की सफलता का उदाहरण देते हुए कहा कि मतभेदों के बावजूद संवाद के जरिये सहमति बनाई जा सकती है।
भारत 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच का आयोजक देश है और श्री बिरला बैठक की कार्यवाही की अध्यक्षता करेंगे। इसका विषय 'जन-केंद्रित विकास हेतु संसदों का सुदृढ़ीकरण' है। इसमें बेहतर भविष्य के लिए संस्थाओं को मजबूत बनाने, जन-केंद्रित नवाचार, संसदीय सहयोग के जरिये वैश्विक शासन को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने तथा टिकाऊ और समावेशी भविष्य के निर्माण में संसदों की भूमिका पर चर्चा होगी।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि इस दौरान संस्थागत मजबूती, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नैतिक उपयोग, डिजिटल बदलाव, वैश्विक शासन में सुधार और सतत विकास जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श होगा। इसके अलावा, ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों की संसदों की अंतरराष्ट्रीय मामलों से संबंधित समितियों के अध्यक्षों की विशेष बैठक होगी जिसमें संसदीय कूटनीति, क्षमता निर्माण और बेहतर कार्यप्रणालियों पर चर्चा की जाएगी।
बैठक में उच्च स्तरीय पूर्ण सत्रों , समानांतर बैठकों और द्विपक्षीय आदान प्रदान के साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाएगा। शिष्टमंडलों के सदस्य भारतीय संसद का दौरा भी करेंगे और दिल्ली में सांस्कृतिक भ्रमण का आनंद भी लेंगे।
उन्होंने बताया कि आयोजन से पहले 25 अक्टूबर को सचिवों की बैठक में संयुक्त वक्तव्य को अंतिम रूप दिया जाएगा। श्री बिरला विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। भारत ने सभी साझेदार देशों के साथ संसदीय मैत्री समूहों का विस्तार किया है।
श्री बिरला ने कहा कि इस दौरान रूस के प्रतिनिधिमंडल के साथ द्विपक्षीय बैठक और भारत-रूस संसदीय मैत्री समूह की बैठक भी होगी।
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