नयी दिल्ली , सितंबर 12 -- ब्रिक्स समूह के सदस्य देशों ने दुनिया भर में खाद्य सुरक्षा और पोषण सुनिश्चित करने के लिए कृषि उत्पादकता, नवाचार और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने का साझा संकल्प लिया है। सम्मेलन में 'ब्रिक्स अनाज व्यापार मंच (ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज) की स्थापना और इसके भावी विकास पर गहराई से चर्चा करने पर सहमति बनी।
भारत की अध्यक्षता में शनिवार को यहां आयोजित 18 वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों द्वारा अपनाये गये 'दिल्ली घोषणा पत्र' में जोर देकर कहा गया है कि वैश्विक खाद्य उत्पादन में ब्रिक्स देश निर्णायक भूमिका निभाते हैं। खाद्य सुरक्षा में स्थिरता लाने, अनाज की कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने और उर्वरक जैसी आवश्यक कृषि सामग्रियों की कमी से अचानक उत्पन्न होने वाले आपूर्ति संकट के प्रभाव को कम करने के लिए यह मंच एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
सदस्य देशों ने ब्रिक्स और अन्य विकासशील राष्ट्रों में खाद्यान्न की उपलब्धता, वहनीयता और पहुंच सुनिश्चित करने पर बल दिया। इसमें राष्ट्रीय खाद्य भंडार प्रणालियों को मजबूत करना और जलवायु-अनुकूल व सूखा-रोधी बीज प्रणालियों का विकास शामिल है। इसमें राष्ट्रीय खाद्य भंडार प्रणालियों को मजबूत करना और जलवायु-अनुकूल व सूखा-रोधी बीज प्रणालियों का विकास शामिल है। इसके अतिरिक्त, खाद्य सुरक्षा और पोषण पर 'दक्कन उच्च-स्तरीय सिद्धांतों' के आधार पर 'भूख और गरीबी के खिलाफ वैश्विक गठबंधन' जैसी अंतरराष्ट्रीय पहलों का समर्थन किया गया।
सदस्य देशों ने कृषि उत्पादों और खेती व अनाज पैदावार के लिए ज़रूरी चीज़ों के लिए ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार को आसान बनाने पर चर्चा पर भी सहमति जतायी। इसमें सशक्त और भेदभाव-रहित सप्लाई चेन को बढ़ावा देना, और वैल्यू चेन और टिकाऊ खेती के तरीकों में सुधार करना शामिल है। सदस्य देशों ने यह भी माना कि पारिवारिक किसान, जिनमें छोटे किसान, पशुपालक, पारंपरिक और छोटे पैमाने के मछुआरे और एक्वाकल्चर उत्पादक, आदिवासी लोग और स्थानीय समुदाय, महिलाएं और युवा (राष्ट्रीय कानूनों के अनुसार) कृषि और अनाज प्रणालियों के ज़रूरी हितधारक हैं।
सदस्यों ने इंदौर में आयोजित 16वीं ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की बैठक के परिणामों का स्वागत करते हुए, किसान-केंद्रित ब्रिक्स एग्रेन (कृषि-आदान, आनुवंशिक संसाधन और सूचना नेटवर्क) की स्थापना पर सहमति जताई गई।
और साझा कृषि चुनौतियों और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण के लिए 'बीज प्रणालियों में किसानों के अधिकारों पर वैश्विक मंच' शुरू करने का निर्णय लिया गया।
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