बेंगलुरु , सितंबर 16 -- ब्रिक्स देश और एशिया की अन्य अर्थव्यवस्थाएं वैकल्पिक वैश्विक भुगतान प्रणाली और व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के अधिक इस्तेमाल की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
इंफोसिस के पूर्व निदेशक टीवी मोहनदास पाई ने बुधवार को कहा कि इस बदलाव से इन देशों की अमेरिका के प्रभुत्व वाली वित्तीय व्यवस्था पर निर्भरता कम हो सकती है। ब्रिक्स और एशियाई देशों के बीच सीमा पार भुगतान के वैकल्पिक तरीकों को लेकर हो रही चर्चा महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, इससे देशों को मौजूदा व्यवस्था के बाहर एक विकल्प मिल सकता है। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था के कारण वैश्विक व्यापार और भुगतान पर अमेरिका का काफी प्रभाव है।
श्री पाई ने यहां आयोजित आईटीआरए सम्मेलन से इतर पत्रकारों से कहा, ''सबसे बड़ी बात जो सामने आई, वह भुगतान के लिए भुगतान प्रणाली है। मौजूदा समय में सोसाइटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशन (स्विफ्ट) का नियंत्रण आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) और अमेरिका के पास है।'' उन्होंने कहा कि किसी देश को वैश्विक वित्तीय व्यवस्था से बाहर करने की क्षमता अमेरिका की ताकत के एक साधन के रूप में उभरी है। उनके अनुसार, संप्रभु देशों के पास अंतरराष्ट्रीय लेनदेन के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, ''अमेरिका किसी भी देश को वैश्विक व्यापार से बाहर कर सकता है और यही अमेरिकी ताकत तथा अमेरिकी वर्चस्व है।''श्री पाई ने कहा कि ब्रिक्स और एशियाई देशों के बीच वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था विकसित करने की कोशिश यह सुनिश्चित करेगी कि अंतरराष्ट्रीय लेनदेन किसी एक देश के नियंत्रण वाली व्यवस्था पर निर्भर न रहें। उन्होंने कहा, ''एशियाई देश एक साथ आकर ऐसी वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था बना रहे हैं, जिसमें उन्हें बाहर नहीं किया जा सकेगा और जिसका नियंत्रण अमेरिका जैसे किसी एक देश के हाथ में नहीं होगा।'' उन्होंने द्विपक्षीय व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के अधिक इस्तेमाल की भी वकालत की। उन्होंने कहा कि देश अपने व्यापार का भुगतान सीधे अपनी-अपनी मुद्राओं में कर सकते हैं, बजाय इसके कि व्यापार के लिए अमेरिकी डॉलर के माध्यम से लेनदेन किया जाये।
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