धार , जून 12 -- ब्रिक्स देशों के लगभग 170 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने आज शुक्रवार को ऐतिहासिक और पर्यटन नगरी मांडू का भ्रमण कर यहां की स्थापत्य कला, सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं का अवलोकन किया। इस दौरान जहाज महल परिसर में आयोजित लाइट एंड साउंड शो तथा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं।

प्रतिनिधिमंडल के जहाज महल पहुंचने पर भारतीय परंपरा के अनुसार भव्य स्वागत किया गया। आजीविका समूह की महिलाओं ने अतिथियों का अक्षत-तिलक लगाकर और आरती उतारकर अभिनंदन किया। मुख्य द्वार पर स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत लोक नृत्यों ने विदेशी मेहमानों का मन मोह लिया। आदिवासी संस्कृति के प्रतीक भगोरिया नृत्य की प्रस्तुति के दौरान कई विदेशी अतिथि भी कलाकारों के साथ थिरकते नजर आए।

जहाज महल परिसर में लगाए गए बाग प्रिंट स्टॉल पर विदेशी मेहमानों ने जिले की प्रसिद्ध हस्तशिल्प कला का अवलोकन किया। शिल्पकारों ने उन्हें बाग प्रिंट की प्रक्रिया का प्रदर्शन कर बताया। कई अतिथियों ने स्वयं भी सांचों की सहायता से डिजाइन तैयार किए और इस कला की सराहना की। शिल्पकारों ने उन्हें बाग प्रिंट के उत्पाद भेंट किए।

प्रतिनिधिमंडल ने जहाज महल सहित विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों का अवलोकन किया और उनकी वास्तुकला की प्रशंसा की। अधिकृत पर्यटन मार्गदर्शकों ने मांडू के इतिहास, जल प्रबंधन प्रणाली और स्थापत्य विशेषताओं की जानकारी दी। दो विशाल तालाबों के बीच स्थित जहाज महल की संरचना और लगभग 500 वर्ष पुरानी जल प्रबंधन व्यवस्था ने अतिथियों को विशेष रूप से प्रभावित किया।

जहाज महल परिसर स्थित संरक्षण प्रयोगशाला में प्रतिनिधियों ने पारंपरिक तरीके से तैयार किए जाने वाले मोर्टार को भी देखा। अधिकारियों ने बताया कि यह मोर्टार टूटी ईंट, गोंद, कबिट, मेथीदाना और उड़द सहित विभिन्न पारंपरिक सामग्रियों से तैयार किया जाता है तथा इसका उपयोग ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण और मजबूती के लिए किया जाता है।

शाम को जहाज महल की प्राचीर पर आयोजित भव्य लाइट एंड साउंड शो में मांडू के गौरवशाली इतिहास को प्रस्तुत किया गया। शो में सुलतानों के शासनकाल से लेकर राजा भोज के कालखंड तक की ऐतिहासिक झलकियों का प्रदर्शन किया गया, जिसे प्रतिनिधिमंडल ने रुचिपूर्वक देखा।

भ्रमण के उपरांत जिला प्रशासन की ओर से अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सम्मान में गाला डिनर का आयोजन किया गया। इसमें मालवा के प्रसिद्ध दाल-बाटी, दाल-पानिया सहित विभिन्न क्षेत्रों के पारंपरिक व्यंजन परोसे गए। सांस्कृतिक कार्यक्रम और संगीत प्रस्तुति ने आयोजन को और आकर्षक बना दिया।

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