नयी दिल्ली , अक्टूबर 26 -- भारत की अध्यक्षता में यहां चल रहे 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के पहले सत्र में सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के निर्माण, आर्थिक सहयोग विस्तार, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने पर जोर दिया।

संसद भवन परिसर स्थित संविधान सदन में सोमवार को शुरू हुए संसदीय मंच में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की अध्यक्षता और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश के संचालन में रूस, चीन, ब्राजील, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और मिस्र सहित सभी देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने सत्र में कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में ब्रिक्स की भूमिका महत्वपूर्ण है और संसदीय संवाद तथा कूटनीति के माध्यम से सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाया जा सकता है।

रूस की स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोदिन ने कहा कि दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है और इसमें ब्रिक्स की भूमिका महत्वपूर्ण तथा प्रभावी हो सकती है। उन्होंने कहा कि वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में ब्रिक्स की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत तक पहुंच गई है। ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों में वैश्विक चुनौतियां सामने हैं, जिनसे निपटने में ब्रिक्स देश महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने विकास की गति तेज करने के लिए सदस्य देशों के बीच तालमेल आवश्यक बताया।

यूएई के प्रतिनिधिमंडल ने समुद्री गलियारों को नियंत्रित करने के औचित्य पर सवाल उठाते हुए कहा कि संसाधनों का उपयोग लाभ और विकास के लिए होना चाहिए लेकिन इसके लिए आपसी सामंजस्य में काम करना जरूरी है। प्रतिनिधिमंडल ने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि ब्रिक्स देशों के लिए अपने दायित्वों के निर्वहन की दिशा में आगे बढ़ने का यह महत्वपूर्ण समय है। यूएई के प्रतिनिधियों ने ऊर्जा सुरक्षा, तेल क्षेत्र, व्यापार एवं निवेश बढ़ाने तथा भारत और यूएई के बीच सहयोग के साथ खाद्य सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों का भी उल्लेख किया।

चीन के प्रतिनिधिमंडल ने ब्रिक्स को मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि दुनिया में तेजी से हो रहे बदलावों के साथ चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। इनसे निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है और इसमें संसदीय प्रणालियों की अहम भूमिका है। प्रतिनिधिमंडल ने संसदीय प्रणालियों को मजबूत करने, उनकी गुणवत्ता बढ़ाने तथा नवाचार के माध्यम से चुनौतियों का समाधान तलाशने पर जोर दिया। उसने शांति और स्थायित्व को वैश्विक विकास के लिए जरूरी बताते हुए कहा कि चुनौतियों से टकराव के बजाय उनके समाधान की दिशा में कदम उठाने चाहिए।

ब्राजील के प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि ब्रिक्स आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहा है और वैश्विक स्तर पर उसकी भूमिका की पहचान मजबूत हो रही है। प्रतिनिधिमंडल ने ऊर्जा से जुड़ी नई चुनौतियों का उल्लेख करते हुए हरित ऊर्जा के महत्व पर जोर दिया और इस क्षेत्र में नए बाजार विकसित करने की आवश्यकता बतायी। मिस्र के प्रतिनिधिमंडल ने संस्थागत नैतिकता को वैश्विक चुनौती बताते हुए इससे निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत पर बल दिया। उसने कमजोर देशों को भी विकास के अवसर उपलब्ध कराने में ब्रिक्स की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

ईरान के प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिका की नीतियों और प्रतिबंधों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि लचीलापन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है लेकिन इसे कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिका के हमलों और प्रतिबंधों को ईरान की राष्ट्रीय एकता तथा संप्रभुता पर प्रहार बताया और कहा कि अमेरिकी हमले का ईरान के बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा पर गंभीर असर पड़ा है। प्रतिनिधिमंडल ने जोर दिया कि सुरक्षा मानव गरिमा के अनुरूप होनी चाहिए और ऐसा कोई भी सैन्य हमला, जो मानव गरिमा के अनुकूल न हो, शांति सुनिश्चित नहीं कर सकता। उसने कहा कि ईरान शांति चाहता है और समस्याओं के समाधान के लिए लचीला रुख रखता है लेकिन किसी भी व्यवस्था में सुरक्षा सुनिश्चित होना जरूरी है।

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