कपूरथला , जुलाई 21 -- पंजाब में कपूरथला जिले को डॉल्फिन पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने पहल शुरू कर दी है।

उपायुक्त आकाश बंसल ने मंगलवार को वन्यजीव विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि ब्यास नदी के किनारे डॉल्फिन पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक प्रस्तुति और कार्ययोजना तैयार की जाए। इसमें नौका विहार, डॉल्फिन दर्शन के लिए निर्धारित व्यूइंग प्वाइंट तथा अन्य इको-टूरिज्म गतिविधियों को शामिल किया जाये।

वन्यजीव विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपायुक्त ने कहा कि कपूरथला जिले में स्थित ब्यास नदी संरक्षण रिजर्व दुर्लभ सिंधु नदी डॉल्फिन (इंडस रिवर डॉल्फिन) का प्राकृतिक आवास है, जिसे पंजाब का राज्य जलीय जीव घोषित किया गया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में ब्यास नदी संरक्षण रिजर्व में तीन डॉल्फिन की पहचान की जा चुकी है।

उपायुक्त ने कहा कि कपूरथला में देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करने की अपार संभावनाएं हैं। इस संबंध में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया के समन्वयक तथा वन्यजीव विभाग के अधिकारियों के साथ पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए डॉल्फिन पर्यटन विकसित करने की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की गयी।

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि ब्यास नदी संरक्षण रिजर्व क्षेत्र में डॉल्फिन की गतिविधियों की निगरानी के लिए 17 'डॉल्फिन मित्र' नियुक्त किये गये हैं। इन स्वयंसेवकों को संरक्षण संबंधी कार्यों के लिए विभाग द्वारा प्रारंभिक प्रशिक्षण भी दिया गया है।

आकाश बंसल ने कहा कि जिला प्रशासन डॉल्फिन मित्रों के लिए रोजगार एवं आजीविका के उचित अवसर भी सुनिश्चित करेगा, ताकि वे संरक्षण कार्यों में प्रभावी ढंग से अपनी भूमिका निभाते रहें। उन्होंने कहा कि यह परियोजना कपूरथला को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नयी पहचान दिलाने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नये अवसर भी सृजित करेगी।

उपायुक्त ने अधिकारियों को ब्यास नदी के किनारे ऐसे उपयुक्त स्थानों की पहचान करने के निर्देश भी दिये, जहां पर्यटक डॉल्फिन को उनके प्राकृतिक आवास में बिना किसी व्यवधान के सुरक्षित रूप से देख सकें। उन्होंने कहा कि इस पहल की सफलता के लिए वन्यजीव विभाग, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया तथा स्थानीय समुदाय के बीच सक्रिय सहयोग अत्यंत आवश्यक होगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि पर्यटन संबंधी बुनियादी ढांचा विकसित करते समय इस दुर्लभ एवं संकटग्रस्त प्रजाति के प्राकृतिक आवास की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

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