बेंगलुरु , मई 01 -- कर्नाटक में बोवरिंग दीवार त्रासदी के बाद लोकायुक्त की कार्रवाई से राज्य के कई शीर्ष-स्तरीय नौकरशाह और पुलिस अधिकारी भी जांच के दायरे में आ गये हैं।

गौरतलब है कि लोकायुक्त ने इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। जिन अधिकारियों के खिलाफ लोकायुक्त ने कार्रवाई शुरू की है, उनमें राज्य की मुख्य सचिव शालिनी रजनीश और ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण (जीबीए) के मुख्य आयुक्त महेश्वर राव भी शामिल हैं। यह कार्रवाई बॉरिंग एंड लेडी कर्जन अस्पताल की चारदीवारी गिरने की घटना के संबंध में की गयी है। इस हादसे में सात लोगों की मौत हो गयी थी।

इस कदम ने जवाबदेही के दायरे को केवल ज़मीनी स्तर के नागरिक निकायों तक सीमित न रखते हुए, उससे आगे बढ़ा दिया है। अब शीर्ष-स्तरीय नौकरशाह और पुलिस अधिकारी भी सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की योजना, देखरेख और रखरखाव में कथित कमियों के लिए जांच के दायरे में आ गये हैं।

जांच का नेतृत्व कर रहे लोकायुक्त न्यायमूर्ति बी.एस. पाटिल ने कहा कि यह मामला केवल उस जगह तक सीमित नहीं रहेगा जहां दीवार गिरी थी, बल्कि इसमें पूरे बेंगलुरु और राज्य के अन्य हिस्सों में नागरिक व्यवस्था की प्रणालीगत विफलताओं की भी जांच की जाएगी। इस जांच में पांच नगर निगमों के आयुक्त, चिकित्सा शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और संबंधित क्षेत्राधिकार वाले पुलिस अधिकारी शामिल होंगे। यह कार्रवाई 30 अप्रैल को लोकायुक्त की तीन-सदस्यीय पीठ द्वारा किए गये एक मौके पर निरीक्षण के बाद की गई है। इस निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने गिरी हुई संरचना की जांच की, पीड़ितों से बातचीत की और आसपास की स्थितियों का जायजा लिया।

इस मामले की शुरुआती जाँच में पता चला है कि निर्माण के तरीके कमज़ोर थे, जिसमें सीमेंट के खोखले ब्लॉक का इस्तेमाल और नींव का ढाँचागत रूप से कमज़ोर होना शामिल है। अधिकारियों ने दीवार के पास बड़ी मात्रा में रेत का ढेर लगाया, जिनसे दीवार गिरने की घटना हुई। इस घटना को "खराब प्रशासन" का मामला बताते हुए लोकायुक्त ने कहा कि बेंगलुरु में नागरिक लापरवाही एक लगातार बनी रहने वाली समस्या है, खासकर मॉनसून के मौसम में, जबकि बारिश के पैटर्न का पहले से ही अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

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