जगदलपुर , अप्रैल 03 -- कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा देने के 48 घंटे के भीतर ही 17 वर्षीय अलीश एक्का ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया।

ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले के साधारण से संतोषपुर गांव की रहने वाली अलीश के लिए यह उपलब्धि सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि उनकी मां के त्याग का सम्मान और दो साल पहले लिए गए एक साहसी फैसले का इनाम है। अलीश की मां प्रमिला एक्का राज्य स्तर की पूर्व हॉकी खिलाड़ी रही हैं, जिन्हें आर्थिक तंगी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण खेल छोड़ना पड़ा था। अलीश भी शुरू में अपनी मां की तरह स्ट्राइकर बनकर भारत का प्रतिनिधित्व करने का सपना देखती थीं। टीम खेलों में सीमित अवसरों के चलते उन्हें अपने खेल करियर पर दोबारा विचार करना पड़ा। अपने गांव से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित बिरसा मुंडा एथलेटिक्स स्टेडियम में कोचों से बातचीत के बाद अलीश ने एथलेटिक्स में कदम रखने और रेस वॉकिंग अपनाने का फैसला किया।

पिछले दो वर्षों में अलीश ने पढ़ाई और कड़ी ट्रेनिंग के बीच बेहतरीन संतुलन बनाए रखा। लंबी दूरी तय कर ट्रेनिंग करने के साथ-साथ उन्होंने बोर्ड परीक्षा की तैयारी भी जारी रखी। बुधवार को उनकी मेहनत रंग लाई, जब उन्होंने 1:04.59 का समय निकालते हुए खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स (केआईटीजी) 2026 में महिलाओं की 10,000 मीटर रेस वॉक स्पर्धा में रजत पदक अपने नाम किया।

17 वर्षीय अलीश ने साई मीडिया से कहा, " शुरुआत में यह बहुत कठिन था क्योंकि मैंने पहले कभी रेस वॉक नहीं की थी। लेकिन मेरे कोच ने कहा कि अगर मैं कड़ी मेहनत करूं, तो मैं इस स्पर्धा में अच्छा कर सकती हूं। मैंने उन पर भरोसा किया और अपना सर्वश्रेष्ठ देने का फैसला किया।"इस उपलब्धि का समय इसे और भी खास बना देता है। अलीश ने खेलों के लिए रवाना होने से ठीक एक दिन पहले अपनी कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा पूरी की थी। अगले 48 घंटों के भीतर ही वह अपने पहले राष्ट्रीय स्तर के पदक का जश्न मना रही थीं।

उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "मेरे पास केआईटीजी के लिए ज्यादा तैयारी का समय नहीं था। मैंने अपनी परीक्षा खत्म की और यहां यह सोचकर आई कि बस अपना सर्वश्रेष्ठ दूंगी। जब मैंने फिनिश लाइन पार की और मुझे पता चला कि मैंने पदक जीत लिया है, तो वह पल अविश्वसनीय था।"उस मुस्कान के पीछे उनकी मां के त्याग की कहानी छिपी है। प्रमिला चार सदस्यों के परिवार की एकमात्र कमाने वाली हैं और एक ज्वेलरी दुकान में काम करती हैं, जहां उन्हें लगभग 5,000 रुपये प्रति माह मिलते हैं। सीमित आय के बावजूद, वह घर का खर्च संभालते हुए यह सुनिश्चित करती हैं कि अलीश और उनका छोटा भाई, जो कक्षा 3 में पढ़ता है, को हर जरूरी सहयोग मिले।

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