बैतूल , अप्रैल 7 -- मध्यप्रदेश में बैतूल जिले के आमला ब्लॉक सहित आसपास के क्षेत्रों में बोरिंग मशीन संचालकों पर किसानों के शोषण के गंभीर आरोप सामने आए हैं। रबी फसल और गन्ने की कटाई के बाद सिंचाई के लिए बोर खनन की बढ़ती मांग का फायदा उठाकर बाहरी एजेंटों द्वारा कथित रूप से मनमानी वसूली और धमकी देने के मामले सामने आ रहे हैं, जिससे किसानों में आक्रोश व्याप्त है।

स्थानीय किसानों का कहना है कि फरवरी से अप्रैल के बीच बोर खनन की होड़ मची रहती है और इसी का लाभ उठाकर छिंदवाड़ा जिले से आए कुछ बोरिंग मशीन मालिक और उनके एजेंट अनियमित तरीके से काम कर रहे हैं। आरोप है कि शुरुआत में कम दर बताकर काम शुरू किया जाता है, लेकिन बाद में बीच में ही रेट बढ़ा दिए जाते हैं। विरोध करने पर काम अधूरा छोड़ने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप भी लगाए गए हैं।

ग्राम मालेगांव के किसान सुक्कू यादव ने बताया कि उनसे 1.20 लाख रुपये अग्रिम लिए गए थे और 850 फीट बोरिंग का वादा किया गया था, लेकिन मशीन 600 फीट पर ही बंद कर दी गई। विरोध करने और पक्का बिल मांगने पर विवाद की स्थिति बन गई और आरोपियों ने बोर में पत्थर डाल दिए। इस मामले में बोरदेही थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है।

इसी तरह ग्राम बामला के किसान दिलीप ने आरोप लगाया कि बोरिंग संचालकों ने 'लेट राड' के नाम पर 21,500 रुपये अतिरिक्त वसूल लिए। बिल मांगने पर उन्हें धमकाया गया। वहीं कमलेश यादव ने आरोप लगाया कि उनसे लेट राड के पैसे तो ले लिए गए, लेकिन पाइप डाले ही नहीं गए।

ग्राम कलमेश्वरा के किसान संतोष यादव ने भी इसी तरह की शिकायत करते हुए कहा कि तय रेट से अधिक राशि का बिल थमा दिया गया। किसानों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाओं से उन्हें आर्थिक और मानसिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

इन मामलों को लेकर किसानों ने एक सप्ताह पहले ही एसडीएम आमला और बोरदेही थाने में लिखित शिकायत दी थी, लेकिन अब तक किसी भी आरोपी के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होने से नाराजगी बढ़ती जा रही है। किसानों का आरोप है कि प्रशासन की सुस्ती के कारण बाहरी एजेंटों के हौसले बुलंद हैं।

बोरदेही थाना प्रभारी राधेश्याम वट्टी ने बताया कि पांच किसानों से शिकायतें प्राप्त हुई हैं और मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। वहीं आमला एसडीएम शैलेंद्र बड़ोनिया ने कहा कि जल्द ही क्षेत्र में सक्रिय बोरिंग एजेंटों की बैठक बुलाई जाएगी और निर्धारित दर से अधिक वसूली या बिल न देने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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