गडग , जुलाई 05 -- कर्नाटक की मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर चल रहे विवाद के बीच पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने रविवार को अपना बयान वापस लेने या माफी मांगने से इनकार कर दिया। इसकी बजाय उन्होंने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) से मतदाता सूची में गंभीर विसंगतियों की व्यापक जांच कराने की मांग की।

कर्नाटक के मंत्री एच.के. पाटिल द्वारा माफी मांगने की मांग को खारिज करते हुए श्री बोम्मई ने स्पष्ट किया कि उनके बयान पूरी तरह से आधिकारिक मतदाता सूची के रिकॉर्ड पर आधारित थे, न कि मंत्री के खिलाफ कोई व्यक्तिगत आरोप थे।

श्री बोम्मई ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने एक ही विधानसभा क्षेत्र के साथ-साथ पड़ोसी गांवों में भी समान नाम और पिता के नाम वाले कई मतदाताओं को देखने के बाद इन संदिग्ध प्रविष्टियों को चिह्नित किया था। उन्होंने दावा किया कि यह मुद्दा पूरी तरह से मतदाता सूची में उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर उठाया गया था।

श्री बोम्मई ने श्री पाटिल द्वारा जारी किए गए स्पष्टीकरण का संज्ञान लेते हुए कहा कि अब चुनाव अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे इस मुद्दे को खारिज करने के बजाय इसकी विस्तृत जांच करें। उन्होंने आरोप लगाया कि ये विसंगतियां केवल श्री पाटिल के मामले तक सीमित नहीं हैं, बल्कि एक ही नाम से चार से पांच मतदाता प्रविष्टियों के कई उदाहरण पहले ही अधिकारियों के संज्ञान में लाए जा चुके हैं।

भाजपा नेता ने इन कथित विसंगतियों को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि चुनाव आयोग के मतदाता मैपिंग अभ्यास के बाद भी ऐसी त्रुटियों का जारी रहना 'चुनावी डेटाबेस' की सत्यनिष्ठा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने सीईओ से इस मुद्दे की गहन जांच की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने का आग्रह किया।

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