रांची , अप्रैल 16 -- झारखंड हाईकोर्ट ने बोकारो की युवती पुष्पा के गुमशुदगी मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार और जांच एजेंसियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं।
कोर्ट ने बरामद नरकंकाल और पीड़िता के माता-पिता के डीएनए सैंपल की जांच कोलकाता स्थित सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेट्री (सीएफएसएल) में कराने का आदेश दिया है। साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर डीएनए जांच रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि बरामद कंकाल का पोस्टमार्टम रांची के रिम्स में कराया जाए। कोर्ट ने साफ कहा कि डीएनए टेस्ट की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार की ओर से बताया गया कि युवती के माता-पिता का डीएनए सैंपल लिया जा चुका है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सुनवाई के दौरान डीजीपी, बोकारो एसपी, एफएसएल डायरेक्टर और एसआईटी के सदस्य अदालत में उपस्थित रहे। इससे पहले बुधवार को बरामद कंकाल को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। प्रार्थी के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि यह कंकाल गुमशुदा युवती का नहीं है, जबकि सरकार की ओर से कहा गया कि पोस्टमार्टम, एफएसएल और डीएनए जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
कोर्ट ने राज्य सरकार से कड़े सवाल पूछते हुए जानना चाहा कि अब तक डीएनए जांच क्यों नहीं कराई गई और क्या युवती के माता-पिता का सैंपल लिया गया है। इस पर सरकार की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर अदालत ने नाराजगी जताई। हाईकोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि एसआईटी जांच में किसी तरह की लापरवाही पाई गई, तो मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जा सकती है।
ज्ञातव्य हो कि युवती 31 जुलाई 2025 से लापता है। इस संबंध में बोकारो के पिंडराजोड़ा थाना में कांड संख्या 147/2025 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
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