मुंबई , अप्रैल 07 -- महाराष्ट्र के राजमार्गों पर अपर्याप्त सार्वजनिक शौचालय सुविधाओं का मुद्दा एक बार फिर बंबई उच्च न्यायालय के समक्ष जनहित याचिका (पीआईएल) के माध्यम से उठाया गया। मामले का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए न्यायालय ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को अपना रुख स्पष्ट करने का निर्देश दिया है और उसे मामले में प्रतिवादी बनाया है।

इससे पहले न्यायालय ने राज्य सरकार के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम को भी नोटिस जारी कर इस मुद्दे पर जवाब मांगा था। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि राजमार्गों पर पर्याप्त शौचालयों का अभाव यात्रियों, विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों और बुजुर्ग नागरिकों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है।

उन्होंने आगे कहा कि ऐसी आवश्यक सुविधाओं का अभाव बुनियादी स्वच्छता और साफ-सफाई तक पहुंच के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।

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