मुंबई , सितंबर 25 -- बॉम्बे उच्च न्यायालय की कोल्हापुर पीठ में अधिवक्ता असीम सरोदे के ज़रिए एक रिट याचिका दायर की गयी है जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार द्वारा अपने सहयोगियों की आपत्तियों के बावजूद उठाये गये 14 कदमों को चुनौती दी गयी है।

याचिकाकर्ताओं ने सीईसी द्वारा 14 विवादित कदमों को रद्द करने, महाराष्ट्र में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को रोकने, हटाये गये मतदाताओं के नाम बहाल करने और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव (जो नवंबर 2029 में होने की उम्मीद है) को तब तक टालने की मांग की है जब तक कि नियमों के मुताबिक मतदाता सूची तैयार और मंज़ूर न हो जाये। साथ ही, उन्होंने सभी कथित अनियमितताओं की जांच के लिए एक स्वतंत्र न्यायिक समिति बनाने की भी मांग की है।

याचिकाकर्ताओं ने हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग करते हुए कहा है कि वे मतदाता सूची के प्रबंधन से जुड़े संवैधानिक नियमों के व्यवस्थित उल्लंघन से परेशान हैं। यह उल्लंघन सीधे तौर पर अनुच्छेद 14 के तहत समान व्यवहार के उनके मौलिक अधिकार और अनुच्छेद 326 के तहत वयस्क मताधिकार के ज़रिए मत देने के उनके संवैधानिक अधिकार को प्रभावित करता है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि मतदाता सूची , मतदाता पंजीयन , मतदाता सूची के डेटाबेस और इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अधिकारियों के कामकाज से जुड़े फ़ैसले जिस तरह से लिए गये, वे कानूनी नियमों के पालन और संवैधानिक कामकाज को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

याचिका में भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) और मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के पिछले दस महीनों में जारी किये गये 14 प्रशासनिक आदेशों और कार्यों को रद्द करने की मांग की गयी है, जिन पर दूसरे चुनाव आयुक्तों ने आपत्तियां जतायी थीं। इन आपत्तियों का संबंध नये मतदाता पंजीयन के लिए 'फॉर्म 6' में बदलाव, मतदाता के नाम हटाने और फिर से जोड़ने, एसाईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाताओँ के नाम बहाल करने के आदेशों के ख़िलाफ़ अपील, और मतदाता सूची के डेटाबेस के प्रबंधन और उस तक पहुंच (एक्सेस) जैसे मामलों से था।

याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयोग के संबंधित अधिकारियों की जानकारी या मंज़ूरी के बिना लिए गए फ़ैसले - जिनमें 'फॉर्म 6' में बदलाव और मतदाता सूची के डेटाबेस तक पहुंच को धीरे-धीरे केन्द्रीयकृत करना शामिल है - "बिना अधिकार के और गैर-कानूनी" हैं।

याचिकाकर्ताओं ने उस तरीके को चुनौती दी है जिससे ईसीआई ने देश में मतदाता सूची तैयार करने, उनमें बदलाव करने, उन्हें बनाये रखने और चुनाव कराने से जुड़े फैसले लिए और लागू किये गये हैं। ऐसा तब किया गया जब दूसरे चुनाव आयुक्तों ने मतदाता पंजीयन , मतदाता सूची के डेटाबेस और इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अधिकारियों के कामकाज को लेकर आपत्तियां दर्ज करायी थीं।

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