मुंबई , अगस्त 29 -- बॉम्बे उच्च न्यायालय ने बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) स्थित मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (एमसीए) परिसर के पांच रेस्तरां का लाइसेंस निलंबित करने पर महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के अधिकारियों को शनिवार को कड़ी फटकार लगायी और उन्हें अवमानना कार्यवाही तथा जेल की चेतावनी दी।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अनखड़ की पीठ एफडीए के लाइसेंस निलंबित करने के फैसले को चुनौती देने वाली एमसीए की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
एफडीए ने 20 अगस्त को इन पांचों रेस्तरांओं का निरीक्षण किया था और खाद्य सुरक्षा व संचालन में खामियों का हवाला देते हुए अगले ही दिन उनके लाइसेंस निलंबित कर दिये थे।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने निलंबन के आदेश को रद्द कर दिया और रेस्तरांओं को फिर से खोलने की अनुमति दे दी। नये निरीक्षण में सामने आया कि ये आउटलेट खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं का लगभग 88 प्रतिशत अनुपालन कर रहे थे।
एफडीए ने न्यायालय के समक्ष एक नया नोटिस जारी करने और एक नया व तर्कसंगत आदेश पारित करने से पहले एमसीए को शिर्के इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ अपने संविदात्मक समझौते को स्पष्ट करने का अवसर देने पर सहमति व्यक्त की।
पीठ ने पाया कि चूंकि रेस्तरांओं ने खाद्य सुरक्षा मानदंडों का काफी हद तक पालन किया था, इसलिए उनके लाइसेंस का निलंबन जारी रखने का कोई औचित्य नहीं था।
न्यायालय ने कहा कि इस तरह के संविदात्मक समझौते को रोकने वाला कोई विशिष्ट प्रावधान नहीं है। इसके साथ ही न्यायालय ने एफडीए को याद दिलाया कि उसने पहले विभाग को इस मामले में व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने का निर्देश दिया था।
एफडीए के आचरण पर नाराजगी जताते हुए पीठ ने कहा कि विभाग उसके पिछले निर्देश का पालन करने में विफल रहा और इसके बजाय उसने अड़ियल व तकनीकी रुख अपनाया।
न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि वे अपने कदमों का औचित्य सिद्ध करने में विफल रहते हैं तो उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जा सकती है और उन्हें जेल का सामना करना पड़ सकता है।
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