मुंबई , मार्च 06 -- बॉम्बे उच्च न्यायालय ने टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालकों के संघ द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें रमजान के महीने में छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास नमाज अदा करने की अनुमति मांगी गई थी।
न्यायालय ने कहा है कि हवाई अड्डों जैसे संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा मामलों को धार्मिक गतिविधियों के अनुरोधों पर प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
इस मामले की सुनवाई गुरुवार को न्यायमूर्ति बी पी कोलाबावाला और न्यायमूर्ति फिरदोष पूनीवाला की खंडपीठ ने की। पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हवाई अड्डों जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में सुरक्षा बनाए रखना सर्वोपरि है और इससे कोई समझौता नहीं किया जा सकता। हालांकि न्यायाधीशों ने स्वीकार किया कि याचिकाकर्ताओं के लिए रमजान का बहुत धार्मिक महत्व है लेकिन उन्होंने कहा कि किसी विशिष्ट सार्वजनिक स्थान पर प्रार्थना करने का कोई कानूनी या धार्मिक अधिकार नहीं है, खासकर जहां सार्वजनिक सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार ने एक रिपोर्ट प्रस्तुत की जिसमें कहा गया कि उसने अनुरोध को पूरा करने के लिए सात वैकल्पिक स्थलों का सर्वेक्षण किया था।अधिकारियों ने हालांकि निष्कर्ष निकाला कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं, क्षेत्र में भारी भीड़भाड़ और हवाई अड्डे की अवसंरचना से संबंधित चल रही विकास योजनाओं के कारण कोई भी स्थान उपयुक्त नहीं था।
न्यायालय ने यह भी गौर किया कि उस क्षेत्र में एक किलोमीटर के दायरे में एक मदरसा स्थित है जहां चालक नमाज अदा कर सकते हैं। इसके अलावा पीठ ने कहा कि हवाई अड्डे पर यात्रियों के लिए पहले से ही विशेष प्रार्थना कक्ष उपलब्ध हैं।
न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया है लेकिन संकेत दिया कि संघ भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण या मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा लिमिटेड को औपचारिक अभ्यावेदन प्रस्तुत कर सकती है। पीठ ने सुझाव दिया कि भविष्य में टर्मिनल 1 के पुनर्विकास के दौरान ऐसे अनुरोध पर विचार किया जा सकता है।
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