नागपुर , सितंबर 22 -- बॉम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने नागपुर नगर निगम (एनएमसी) के इस दावे पर सवाल उठाया है कि उसके अधिकारी उच्चतम न्यायालय की उन विस्तृत दिशानिर्देशों से अनजान थे जो तोड़-फोड़ और बुलडोज़र कार्रवाई को नियंत्रित करती हैं।

पीठ ने कहा कि नगर निकाय ऐसी कार्रवाई करने से पहले आसानी से उच्चतम न्यायालय के आदेशों को उसकी आधिकारिक वेबसाइट से देख सकता था या कानूनी सलाह ले सकता था।

न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश रजनीश व्यास की खंड पीठ सोमवार को दो याचिकाओं (नंबर 1600 और 1601, 2025) पर सुनवाई कर रही थी। ये याचिकाएं 69 वर्षीय मेहरुन्निसा शमीम खान (औरंगजेब के मकबरे के पास हुए दंगों के मुख्य आरोपी फहीम खान की मां) और 96 वर्षीय अब्दुल हफीज (जिनकी संपत्ति नागपुर के महल इलाके में हुए दंगों के मामले में एक रिश्तेदार के आरोपी बनाए जाने के बाद आंशिक रूप से तोड़ दी गई थी) ने दायर की थीं।

न्यायालय की ये टिप्पणियां दंगों के बाद नगर निकाय द्वारा की गयी तोड़-फोड़ की कार्रवाई की वैधता की जांच के दौरान आईं। पीठ ने कहा कि क्या एनएमसी ने कार्रवाई शुरू करने से पहले उच्चतम न्यायालय के दिशानिर्देश की ठीक से जांच की थी। वकील अश्विन इंगोले के माध्यम से दायर इन याचिकाओं में अशांति के बाद नगर निकाय द्वारा की गई तोड़-फोड़ की कार्रवाई को चुनौती दी गयी है।

सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि एनएमसी तोड़-फोड़ की कार्रवाई करने से पहले शीर्ष अदालत का आदेश उसकी आधिकारिक वेबसाइट से प्राप्त करने या कानूनी सलाह लेने में क्यों विफल रहा। न्यायालय ने कहा, "अगर एनएमसी को बुलडोज़र कार्रवाई के बारे में अखबारों की खबरों पर भरोसा नहीं है, तो क्या वह अपने वकीलों से कानूनी सलाह नहीं ले सकता था? उच्चतम न्यायालय का संबंधित आदेश उसकी वेबसाइट पर उपलब्ध है। क्या वह उसे डाउनलोड करके देख नहीं सकता था?"ये बातें तब सामने आईं जब एनएमसी और उसके अधिकारियों ने पहले दिए गए हलफनामों में कहा कि उन्हें बुलडोज़र कार्रवाई पर उच्चत न्यायालय के फ़ैसले के बारे में मीडिया रिपोर्टों से पता चला था, लेकिन उन्हें आदेश में दिए गए विस्तृत निर्देशों की जानकारी नहीं थी। उस समय के एनएमसी आयुक्त और तीन अन्य अधिकारियों ने अलग-अलग हलफनामे दाखिल किए थे।

न्यायालय ने पहले अधिकारियों को उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बारे में जानकारी न होने की बात को समझाने का मौका दिया था। पीठ ने सोमवार को उस स्पष्टीकरण का आधार जानना चाहा और पूछा कि क्या एनएमसी अधिकारियों ने शीर्ष अदालत की आधिकारिक वेबसाइट से आदेश को देखने की कोई कोशिश की थी।

पीठ ने पूछा कि क्या नगर निकाय के कानूनी विभाग ने अधिकारियों को उच्चतम न्यायालय द्वारा जारी निर्देशों के बारे में सलाह दी थी। पीठ ने अब एनएमसी को अपना पक्ष स्पष्ट करने का एक और मौका दिया है और नगर निगम को दो हफ़्ते के भीतर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए एक नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। हलफनामा दाखिल होने के बाद मामले की आगे सुनवाई होगी।

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