मुंबई , जुलाई 15 -- बॉम्बे उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि यदि मजबूत इच्छाशक्ति दिखायी जाये और कचरा प्रबंधन नियमों को कड़ाई से लागू किया जाये तो बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के लिए देश के सबसे साफ शहर इंदौर की तर्ज पर मुंबई में सफाई व्यवस्था बनाये रखना मुमकिन है।

उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने कहा कि बीएमसी के पास 'अथाह संसाधन' हैं और यदि वह ठोस कचरा प्रबंधन नियमों को सही ढंग से लागू करे तो नगर निकाय के लिए सड़कों और सार्वजनिक स्थलों को साफ रखना 'मुश्किल नहीं' है।

उच्च न्यायालय ने बीएमसी की कमिश्नर अश्विनी भिड़े को वार्ड अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और सार्वजनिक स्थानों, सड़कों एवं फुटपाथों पर कचरा फेंकने से रोकने में नाकाम रहने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

खंडपीठ ने कहा कि यह प्रत्येक वार्ड अधिकारी का कर्तव्य है कि वह यह सुनिश्चित करे कि उनका संबंधित वार्ड निवासियों के पैदा किये गये और सड़कों एवं खुले इलाकों में फेंके गये ठोस कचरे से मुक्त रहे।

उच्च न्यायालय ने कहा कि कचरे का सही ढंग से निपटान न होने से गंभीर समस्याएं पैदा होती हैं, जिनमें जलभराव, जनता के लिए परेशानी और नागरिकों की सेहत व साफ-सफाई से जुड़ी चिंताएं शामिल हैं।

उच्च न्यायालय ने बीएमसी को ठोस कचरा प्रबंधन उपनियमों को भी कड़ाई से लागू करने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि नियमों के उल्लंघन के लिए वार्ड स्तर के अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाए।

इंदौर के साथ मुंबई के स्वच्छता प्रयासों की तुलना करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि बेहतर मानकों को हासिल करने के लिए केवल काम करने के जज्बे और मौजूदा नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने की जरूरत है।

ये टिप्पणियां शहर में कचरा प्रबंधन और साफ-सफाई के मुद्दों से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की गयी।

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