कोलकाता , अप्रैल 27 -- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के चुनाव प्रचार के अंतिम दिन के दौरान बैरकपुर रैली में राज्य के साथ अपने व्यक्तिगत और आध्यात्मिक संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि बंगाल से उनका रिश्ता राजनीति से परे है।श्री मोदी ने बैरकपुर में लोगों के दिलों को छू लिया। उन्होंने अपने 47 मिनट के भाषण का लगभग आधा समय अपने जीवन, आध्यात्मिक यात्रा और बंगाल के साथ अपने भावनात्मक जुड़ाव पर विचार करने में बिताया, जिसके बाद उन्होंने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोला।
प्रधानमंत्री ने कहा, "जिस दिन मैंने घर छोड़ा, मुझे लगा कि मैं आपके बीच रहने आया हूं। आप ही मेरा परिवार हैं।" उन्होंने स्वयं को बाहरी बताए जाने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बंगाल उनके जीवन और आध्यात्मिक यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को व्यापक समर्थन मिल रहा है और चुनाव के बाद उन्हें शपथ ग्रहण समारोह के लिए फिर आना पड़ेगा। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने चुनाव प्रचार को राजनीतिक कार्यक्रम के बजाय आध्यात्मिक यात्रा बताया। उन्होंने कहा कि बंगाल उनकी आध्यात्मिक चेतना की जन्मभूमि है।
बैरकपुर के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 1857 में इस भूमि ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष की प्रेरणा दी थी और अब यह परिवर्तन का संदेश दे रही है।
उन्होंने एक निजी किस्सा साझा करते हुए कहा, "कल आरामबाग में मैंने एक छोटी बहन को देखा जो आगे आने की कोशिश कर रही थी और सुरक्षाकर्मियों से जूझ रही थी। वह अपने बच्चों को पीछे छोड़कर आयी थी। मैं उनसे न मिल पाने के लिए माफी मांगता हूं। मैं उनकी भावनाओं का सम्मान करता हूं और उम्मीद करता हूं कि किसी दिन उनसे मिलूंगा।"उन्होंने कहा कि पूरे बंगाल की महिलाओं का आशीर्वाद उन्हें प्रेरित करता है। प्रधानमंत्री के अनुसार, जब वह लोगों की उम्मीदों को महसूस करते हैं, तो पूरे दिन का व्यस्त कार्यक्रम महत्वहीन हो जाता है।
उन्होंने कहा, "जब मैं आधी रात को भी पहुंचता हूं, तो मुझे भेजे गये सभी पत्र पढ़ता हूं और तस्वीरें देखता हूं। इससे मुझे सुकून मिलता है।"प्रधानमंत्री ने बैरकपुर पर लौटते हुए कहा, "बैरकपुर ने 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने का साहस दिया था, और अब यह बदलाव का अग्रदूत बन रहा है।"प्रधानमंत्री ने कहा कि यह चुनाव केवल पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि पूर्वी भारत की दिशा और विकास को भी प्रभावित करेगा। उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का उल्लेख करते हुए राष्ट्रवादी विरासत को रेखांकित किया और कहा कि समृद्ध बंगाल का सपना उनकी प्राथमिकता है।
श्री मोदी ने तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि "मां, माटी, मानुष" के नारे के बावजूद महिलाओं की सुरक्षा, किसानों और युवाओं के लिए पर्याप्त कार्य नहीं हुआ। उन्होंने राज्य में उद्योगों के पतन, हिंसा और कथित घुसपैठ के मुद्दे उठाते हुए कहा कि कोलकाता की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखना आवश्यक है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कोलकाता को उसकी मूल पहचान और गौरव के साथ आगे बढ़ाना समय की मांग है।
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