बैतूल , जुलाई 2 -- मध्यप्रदेश का बैतूल जिला वन प्रबंधन के एक नए राष्ट्रीय मॉडल की प्रयोगशाला बनने जा रहा है। लगभग 100 करोड़ रुपये की प्रस्तावित 'लैंडस्केप परियोजना' के माध्यम से पहली बार जंगल, वन्यजीव, जल स्रोत, जैव विविधता, कृषि और वनाधिकार प्राप्त परिवारों के विकास को एकीकृत ढांचे में जोड़ने की तैयारी की जा रही है। परियोजना सफल होने पर इसे देश के अन्य वन क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है।
परियोजना का राष्ट्रीय स्तर पर मार्गदर्शन बैतूल के पूर्व मुख्य वन संरक्षक राकेश भूषण सिन्हा कर रहे हैं, जो वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) में वरिष्ठ सलाहकार हैं। प्रस्तावित परियोजना का क्रियान्वयन मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम, बैतूल और छिंदवाड़ा जिलों के साथ महाराष्ट्र के मेलघाट तक फैले वन्यजीव गलियारा क्षेत्र में किए जाने का प्रस्ताव है।
परियोजना के तहत पूरे सतपुड़ा-मेलघाट वन क्षेत्र को एक साझा पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित करने की अवधारणा अपनाई गई है। इसमें वन्यजीवों के आवागमन, जल स्रोतों, ग्रामीण आबादी, कृषि क्षेत्र, वनाधिकार प्राप्त गांवों और प्राकृतिक संसाधनों को एकीकृत कर संरक्षण और विकास की संयुक्त रणनीति तैयार की जाएगी।
योजना की विशेषता यह है कि जंगलों के संरक्षण और वनाधिकार प्राप्त परिवारों की आजीविका दोनों को समान महत्व दिया जाएगा। इसका उद्देश्य वनाधिकारधारकों की आय बढ़ाने के साथ जंगलों पर अतिरिक्त दबाव को कम करना है।
परियोजना में वन विभाग के साथ जिला प्रशासन की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। जिला कलेक्टर परियोजना संचालन समिति के अध्यक्ष होंगे, जबकि संबंधित वनमंडलाधिकारी सदस्य सचिव की जिम्मेदारी निभाएंगे। कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, ग्रामीण विकास, जल संसाधन और अन्य विभागों की योजनाओं का भी समन्वय किया जाएगा।
परियोजना संयुक्त राष्ट्र की जलवायु परिवर्तन, मरुस्थलीकरण रोकने और जैव विविधता संरक्षण संबंधी तीन प्रमुख पर्यावरणीय संधियों के उद्देश्यों पर आधारित होगी। इसके लिए ग्लोबल एनवायरमेंट फैसिलिटी से लगभग 11 मिलियन डॉलर (करीब 100 करोड़ रुपये) की वित्तीय सहायता प्रस्तावित है।
फिलहाल परियोजना प्रारंभिक चरण में है। पहले अवधारणा पत्र तैयार कर भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय तथा संबंधित एजेंसियों को भेजा जाएगा। इसके बाद स्वीकृति मिलने पर विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार किया जाएगा, जिसे नवंबर तक प्रस्तुत करने का लक्ष्य रखा गया है।
हाल ही में बैतूल में राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों, वरिष्ठ अधिकारियों और तकनीकी दल की बैठक में सतपुड़ा-मेलघाट क्षेत्र का अध्ययन कर स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप परियोजना की रूपरेखा पर विचार-विमर्श किया गया।
दक्षिण वन मंडल के वनमंडलाधिकारी अरिहंत ने बताया कि परियोजना का उद्देश्य वनाधिकारधारकों तक विभिन्न विभागों की योजनाओं का समन्वित लाभ पहुंचाना है। इससे उनकी आय बढ़ाने के साथ जंगलों के संरक्षण को भी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार परियोजना से वन संरक्षण, जल संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन, वन्यजीव गलियारों की सुरक्षा तथा विभिन्न विभागों की योजनाओं के बेहतर समन्वय के माध्यम से क्षेत्र के समग्र विकास को गति मिल सकती है। हालांकि इसकी सफलता के लिए दो राज्यों और विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी समन्वय, समय पर स्वीकृतियां, वित्तीय संसाधनों का पारदर्शी उपयोग तथा स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक होगी।
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