बैतूल , वार्ता 25 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में राजस्व भूमि को आरक्षित वन घोषित किए जाने की प्रक्रिया को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।
जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) ने राजस्व और वन विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि बिना वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए सार्वजनिक जमीनों को आरक्षित वन में शामिल किया जा रहा है। संगठन ने इस संबंध में महामहिम राज्यपाल के नाम कलेक्टर बैतूल को ज्ञापन सौंपकर 456 वनखण्डों पर विधिक आपत्ति दर्ज कराई है।
जयस के पदाधिकारियों के अनुसार बैतूल, मुलताई और भैंसदेही अनुविभागीय कार्यालयों में बड़ी संख्या में ऐसे प्रकरण लंबित हैं, जिनमें राजस्व अभिलेखों में दर्ज जमीनों को वन भूमि में परिवर्तित करने की कार्रवाई चल रही है। संगठन का दावा है कि अनुविभागीय अधिकारी बैतूल के समक्ष 181, भैंसदेही में 217 और मुलताई में 58 वनखण्डों से जुड़े मामले विचाराधीन हैं।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित