बैतूल , अप्रैल 13 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में शिक्षा व्यवस्था की चिंताजनक तस्वीर सामने आई है, जहां छात्र संख्या शून्य होने और सांदीपनि स्कूलों में विलय की प्रक्रिया के चलते बीते दो वर्षों में 30 स्कूल बंद हो गए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार इनमें 15 स्कूल सांदीपनि स्कूल भवन बनने के बाद अन्य स्कूलों में मर्ज कर दिए गए, जबकि 15 स्कूलों में नामांकन शून्य होने के कारण बंद करना पड़ा। स्कूल बंद होने के बाद उनके भवनों की हालत लगातार खराब होती जा रही है।

कई स्थानों पर स्कूल भवन खंडहर में तब्दील हो चुके हैं, बाउंड्रीवाल क्षतिग्रस्त हो गई हैं और परिसरों में झाड़ियां उग आई हैं। कुछ जगहों पर इन परिसरों का उपयोग मवेशी बांधने के लिए किया जा रहा है, वहीं खाली भवनों में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा भी बढ़ रहा है, जिससे स्थानीय लोगों में असुरक्षा की भावना बनी हुई है।

बैतूल, चिचोली, घोड़ाडोंगरी, मुलताई और शाहपुर ब्लॉकों के कई स्कूल इस सूची में शामिल हैं। इनमें बघोली, मानसनगर, मोहटाढाना, गर्ल्स स्कूल चिचोली, मागारोडी, पटेलपुरा, गौलीपुरा, सलैया, सारंगढाना, तालाबढाना, बूकाखेड़ी, कुटखेड़ी, गुल्लरढाना, किरकिरी और पतौवापुरा जैसे स्कूल प्रमुख हैं। इन स्कूलों के शिक्षकों को अन्य संस्थानों में स्थानांतरित कर दिया गया है।

एक वर्ष पूर्व बैतूलबाजार में सांदीपनि स्कूल भवन तैयार होने के बाद आसपास के 13 प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को उसमें मर्ज किया गया था, जबकि घोड़ाडोंगरी में भी दो स्कूलों का विलय किया गया। हालांकि मर्ज किए गए स्कूलों के भवनों के उपयोग को लेकर बनाई गई योजना अब तक लागू नहीं हो सकी है।

स्थानीय स्तर पर इन भवनों को महिला एवं बाल विकास विभाग, सहकारी समितियों और पंचायतों को सौंपने की योजना बनी थी। आरुल पंचायत में एक भवन सहकारी समिति को दिया गया है, लेकिन अधिकांश भवन अब भी उपयोग से बाहर पड़े हैं।

जिला शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र वरकड़े ने बताया कि बंद स्कूलों के भवन विभाग के पास हैं और शासन से निर्देश मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने भवनों की देखरेख का दावा किया, हालांकि जमीनी स्थिति इससे अलग नजर आ रही है।

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