बैतूल , अप्रैल 26 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत आयोजित शिविरों में गंभीर स्थिति सामने आई है। कुल 587 गर्भवती महिलाओं की जांच में से 346 को हाई रिस्क श्रेणी में चिन्हित किया गया है, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था और जागरूकता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज कुमार हुरमाड़े के अनुसार शिविरों में महिलाओं की आवश्यक जांचें, जिनमें रक्त परीक्षण और गर्भकालीन मधुमेह की जांच शामिल है, कराई गईं। इसके अलावा 79 महिलाओं की सोनोग्राफी भी की गई। अभियान का उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान जटिलताओं की समय रहते पहचान कर सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करना है, लेकिन आंकड़े स्थिति की गंभीरता दर्शा रहे हैं।
जिला अस्पताल बैतूल में 55 महिलाओं की जांच में 19 हाई रिस्क पाई गईं, जबकि घोड़ाडोंगरी में 50 में से 46 महिलाएं हाई रिस्क श्रेणी में रहीं। चिचोली में स्थिति सबसे चिंताजनक रही, जहां जांची गई सभी 121 महिलाएं हाई रिस्क पाई गईं। भैंसदेही, मुलताई, शाहपुर और भीमपुर सहित अन्य केंद्रों में भी बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आए हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार हाई रिस्क गर्भावस्था के प्रमुख कारणों में कुपोषण, एनीमिया, समय पर जांच न होना, कम उम्र में गर्भधारण और पूर्व से मौजूद बीमारियां शामिल हैं। आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और जागरूकता में अभी भी कमी है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि समय रहते प्रभावी प्रबंधन नहीं होने पर मातृ और शिशु मृत्यु दर बढ़ने की आशंका है। उन्होंने फॉलोअप, पोषण सुधार और नियमित निगरानी पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई है।
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