बैतूल , जनवरी 30 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में किसानों का रुझान तेजी से बदल रहा है।

उचित दाम नहीं मिलने से किसान मक्का से दूरी बना रहे हैं, वहीं ग्रीष्मकालीन मूंग की जगह अब मूंगफली को बढ़ावा दिया जा रहा है। कृषि विभाग ने किसानों को प्रशिक्षण और मुफ्त बीज देकर मूंगफली उत्पादन की दिशा में प्रेरित करने की पहल शुरू की है।

बीते वर्ष कुछ जिलों में मूंग की फसल को जहरीली बताए जाने के बाद समर्थन मूल्य पर खरीदी को लेकर विवाद हुआ था। इसी अनुभव को देखते हुए जिले में कृषि विभाग ने नेशनल मिशन ऑन ऑयल सीड प्रोग्राम के तहत मूंग की जगह मूंगफली को विकल्प के रूप में आगे बढ़ाया है। वर्तमान में जिले में मूंगफली की खेती 237 हेक्टेयर में होती है, जिसे बढ़ाकर 300 हेक्टेयर करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत पांच ब्लॉकों के 471 किसानों को चिन्हित किया गया है।

शाहपुर में 30 हेक्टेयर में 108 किसान, घोड़ाडोंगरी में 40 हेक्टेयर में 89 किसान, आठनेर में 100 हेक्टेयर में 100 किसान, प्रभातपट्टन में 80 हेक्टेयर में 103 किसान और भैंसदेही में 50 हेक्टेयर में 71 किसान इसकी खेती करेंगे। किसानों को मुफ्त प्रशिक्षण के साथ प्रति हेक्टेयर 20 किलो बीज निशुल्क दिए जा रहे हैं, जबकि अतिरिक्त बीज मात्र 20.17 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

दूसरी ओर मक्का का रकबा लगातार घट रहा है। बीते साल 1632 हेक्टेयर में ग्रीष्मकालीन मक्का बोई गई थी। इस वर्ष लक्ष्य 2400 हेक्टेयर रखा गया था, लेकिन अब तक केवल 1500 हेक्टेयर में ही बुआई हो सकी है। पहले जहां मक्का के दाम 20 रुपये किलो तक पहुंचे थे, वहीं अब भाव घटकर 13-14 रुपये किलो रह गए हैं, जिससे किसान इसकी खेती से कतराने लगे हैं।

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