बैतूल , जुलाई 23 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में महिलाओं की आजीविका सुदृढ़ करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत पहली बार वैज्ञानिक पद्धति से केज कल्चर (पिंजरा आधारित) मत्स्य पालन शुरू करने की तैयारी की गई है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत प्रस्तावित इस परियोजना पर लगभग 58 लाख रुपये व्यय होने का अनुमान है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार परियोजना के लिए सारणी स्थित सतपुड़ा डैम और बैतूल के सांपना डैम का चयन किया गया है। दोनों जलाशयों में 18-18 फ्लोटिंग केज स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक जलाशय के लिए लगभग 29 लाख रुपये की आवश्यकता होगी। इसके लिए कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) तथा जिला खनिज प्रतिष्ठान (डीएमएफ) से वित्तीय सहायता का प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति मिलने के बाद कार्य प्रारंभ किया जाएगा।
केज कल्चर तकनीक में जलाशय के भीतर तैरते विशेष पिंजरों में मछलियों का पालन किया जाता है। नियंत्रित वातावरण में मछलियों का विकास होने से बेहतर गुणवत्ता और अधिक उत्पादन प्राप्त होता है। इस पद्धति के लिए 40 से 50 फीट गहरे जलाशयों की आवश्यकता होती है।
परियोजना के अनुसार एक केज से पहले वर्ष में लगभग दो टन मछली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जो अगले वर्षों में बढ़कर ढाई टन तक पहुंच सकता है। अनुमान है कि 18 केजों से पहले वर्ष में लगभग नौ लाख रुपये का शुद्ध लाभ होगा, जबकि दूसरे वर्ष से यह बढ़कर 15 से 16 लाख रुपये तक हो सकता है। परियोजना के तहत मुख्य रूप से पंगेशियस प्रजाति की मछली का पालन किया जाएगा।
दोनों डैमों पर अलग-अलग महिला स्व-सहायता समूहों को मत्स्य पालन की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। परियोजना में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कुल लागत का 20 प्रतिशत अंशदान भी समूहों से लिया जाएगा, जिससे परियोजना के संचालन में उनकी सहभागिता और स्वामित्व की भावना मजबूत होगी। अधिकारियों के अनुसार इस पहल से जिले में वैज्ञानिक मत्स्य पालन को बढ़ावा मिलेगा, महिलाओं की आय में वृद्धि होगी तथा मत्स्य पालन आधारित आजीविका को नई मजबूती मिलेगी।
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