बैतूल , जुलाई 30 -- मध्यप्रदेश के बैतूल नगर पालिका को नगर निगम में उन्नत करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। प्रशासन ने प्रस्तावित नगर निगम के गठन के लिए एक कोर कमेटी का गठन किया है, जो शासन के निर्धारित मापदंडों के अनुरूप आवश्यक अभिलेख, नक्शे और तकनीकी जानकारी तैयार करेगी। प्रारंभिक आकलन के अनुसार प्रस्तावित नगर निगम में 48 वार्ड बनाए जाने की संभावना है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार नगर निगम गठन के प्रस्ताव में बैतूल नगर पालिका, बैतूल बाजार नगर परिषद तथा आसपास की 29 ग्राम पंचायतों को शामिल किए जाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए संबंधित निकायों से आबादी, कर्मचारियों, परिसंपत्तियों और अन्य प्रशासनिक जानकारियां एकत्र की जा चुकी हैं। नगर निगम में शामिल होने संबंधी प्रस्ताव भी संबंधित निकायों से प्राप्त किए जा रहे हैं।

सक्षम अधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बैतूल डॉ. अभिजीत सिंह ने प्रक्रिया को गति देने के लिए गठित कोर कमेटी में नगर पालिका परिषद बैतूल, नगर परिषद बैतूल बाजार तथा जनपद पंचायत बैतूल के तकनीकी अधिकारियों को शामिल किया है। समिति को शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप सभी तकनीकी एवं राजस्व संबंधी दस्तावेज समयबद्ध तरीके से तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

हाल ही में आयोजित बैठक में डॉ. सिंह ने समिति के सदस्यों को प्रस्तावित 29 ग्राम पंचायतों के खसरा विवरण, कुल रकबा, वार्डों की मैपिंग, शासकीय एवं स्थानीय परिसंपत्तियों का आकलन तथा प्रशासनिक जानकारियां निर्धारित समय सीमा में संकलित करने के निर्देश दिए। इन आंकड़ों के आधार पर नगर निगम गठन का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर राज्य शासन को अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित नगर निगम की अनुमानित आबादी लगभग 2.16 लाख होगी। नगर निगम के गठन के बाद वार्डों का नए सिरे से परिसीमन किया जाएगा। प्रारंभिक आकलन के अनुसार 48 वार्ड बनाए जा सकते हैं, हालांकि अंतिम संख्या शासन की मंजूरी और परिसीमन प्रक्रिया के बाद तय होगी।

नगर निगम बनने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए शहर की भौगोलिक स्थिति के अनुरूप जोनल कार्यालय स्थापित करने की भी योजना है। इनके माध्यम से नागरिकों को अधिकांश सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही जिन ग्राम पंचायतों में नल-जल योजनाएं पंचायतों के माध्यम से संचालित हो रही हैं, उन्हें भी नगर निगम के अधीन लाकर पेयजल आपूर्ति एवं रखरखाव की जिम्मेदारी निगम को सौंपी जाएगी।

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