बैतूल , अक्टूबर 20 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के सारणी क्षेत्र के समीप छतरपुर और उमरी गांव की टेकरी पर विजयादशमी के अवसर पर रावण दहन नहीं किया जाता, बल्कि आदिवासी समुदाय के लोग 'रावण देव बाबा' की पूजा-अर्चना करते हैं। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है।
छतरपुर निवासी ग्रामीण रमेश वरकड़े के अनुसार, गांव की ऊंची टेकरी पर रावण देव बाबा का प्राचीन मंदिर स्थित है। ग्रामीणों की मान्यता है कि यह मंदिर करीब 100 से 200 वर्ष पुराना है और इसकी परंपरा आदिवासी समाज के पूर्वजों ने शुरू की थी।
ग्रामीणों का कहना है कि दशहरे पर रावण के पुतले का दहन करने की परंपरा और रावण देव बाबा की पूजा की मान्यता अलग-अलग हैं। स्थानीय आदिवासी समुदाय रावण देव बाबा को अपने रक्षक और पूर्वजों के आराध्य के रूप में पूजता है।
विजयादशमी पर आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग टेकरी पर पहुंचकर विधि-विधान से पूजा करते हैं। ग्रामीणों ने इस परंपरा को अपनी लोक-संस्कृति, आस्था और पारंपरिक पहचान का हिस्सा बताया है।
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