बिलासपुर , अप्रैल 01 -- छत्तीसगढ़ में बिलासपुर स्थित एक अदालत ने तोरवा क्षेत्र में साढ़े तीन साल पहले एक मासूम बच्ची की निर्मम हत्या करने के मामले में उसके पिता को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनायी है।
तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश किरण त्रिपाठी ने यह फैसला सुनाया है। उन्होंने पांच साल की सौतेली बेटी पायल की हत्या करने वाले पिता मन्नू बंजारे को दोषी ठहराते हुए यह सजा सुनायी। साथ ही 1000 रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर छह माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
ये फ़ैसला मंगलवार शाम सुनाया गया जिसकी जानकारी आज मीडिया को दी गई।
अतिरिक्त लोक अभियोजक देवेंद्र राव सोमावार ने अदालत को बताया कि आरोपी अपनी सौतेली बेटी से नफरत करता था और उसे अपना नहीं मानता था। इसी नफरत के चलते उसने 25 अगस्त 2022 को दोपहर में बच्ची को अरपा नदी में नहलाने के बहाने ले जाकर पानी में डुबोकर उसकी हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपी ने बच्ची के कपड़े नदी किनारे झाड़ियों में छिपा दिए, ताकि किसी को शक न हो।
घटना के दिन जब बच्ची की मां राधिका काम से घर लौटी तो पायल घर पर नहीं थी। आरोपी ने शुरुआत में उसे गुमराह किया। बाद में तोरवा थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। अगले ही दिन मस्तूरी के पास कर्रा एनीकेट में बच्ची का शव बरामद हुआ, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
पुलिस की कड़ी पूछताछ में आरोपी टूट गया और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसकी निशानदेही पर बच्ची का फ्रॉक भी बरामद किया गया, जो अहम सबूत बना। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 13 महत्वपूर्ण साक्ष्य और वैज्ञानिक रिपोर्ट अदालत के सामने पेश किए, जिनके आधार पर आरोपी के खिलाफ मामला मजबूत हुआ।
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