पटना , अक्टूबर 29 -- ाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को समाप्त करने और बेटियों को शिक्षा, सुरक्षा एवं आत्मनिर्भरता के समान अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बिहार में 'बाल विवाह मुक्त भारत अभियान' के तहत जन जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास निगम की ओर से 21 अक्टूबर से 21 दिसंबर 2026 तक संचालित इस अभियान का उद्देश्य बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति लोगों को जागरूक करना, सामाजिक सोच में बदलाव लाना और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए सामुदायिक भागीदारी बढ़ाना है। बाल विवाह की रोकथाम के लिए कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ सामाजिक जागरूकता जरूरी है। इसके मद्देनजर राष्ट्रीय स्तर पर इस अभियान की शुरुआत पहली बार 27 नवंबर 2024 को की गई थी।अभियान के तहत परिवारों, पंचायत प्रतिनिधियों, शिक्षकों, युवाओं और सामाजिक संगठनों की भागीदारी पर जोर दिया जा रहा है। विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में बाल अधिकारों पर चर्चा, जागरूकता गतिविधियों और शपथ कार्यक्रमों के माध्यम से किशोर-किशोरियों को उनके अधिकारों की जानकारी दी जा सकती है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में अभिभावकों को जागरूक कर बाल विवाह के प्रति सामाजिक स्वीकृति समाप्त करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे। विवाह समारोहों से जुड़े आयोजकों और धार्मिक संस्थानों की सहभागिता भी इसमें महत्वपूर्ण होगी।

महिला एवं बाल विकास निगम की प्रबंध निदेशक इनायत खान ने कहा कि बाल विवाह की रोकथाम के लिए केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज की सोच बदलना भी जरूरी है। बेटियों को शिक्षा, सुरक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर मिलने चाहिए। उन्होंने कहा कि जनजागरूकता और सामुदायिक भागीदारी से ही इस कुरीति को समाप्त कर बच्चों के सुरक्षित भविष्य की नींव रखी ज सकती है।

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