जालंधर, अगस्त 01 -- कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं जालंधर कैंट से विधायक परगट सिंह ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार पर बेअदबी के मामलों में सख्त कानून बनाने के वादे से पीछे हटने का आरोप लगाया है।
श्री सिंह ने शनिवार को कांग्रेस भवन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि सरकार ने इस संवेदनशील विषय पर गंभीरता दिखाने के बजाय जानबूझकर विधानसभा सत्र में देरी की और व्यापक चर्चा से परहेज किया। गत 29 जून को श्री अकाल तख्त साहिब में हुई बैठक के बाद सरकार के पास सभी पक्षों से विचार-विमर्श करने के लिए पर्याप्त समय था। इसके बावजूद विधानसभा सत्र तीन अगस्त को बुलाया गया। उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब ने संशोधनों के लिए एक माह का समय दिया था ताकि सिख विद्वानों और कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेकर आवश्यक बदलाव किए जा सकें, लेकिन सरकार ने न तो कोई विशेषज्ञ समिति गठित की और न ही सर्वदलीय बैठक बुलाई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने श्री अकाल तख्त साहिब को भेजे पत्र में दावा किया कि गुप्त बैठक के बाद कानून में संशोधन कर दिया गया, जबकि इस विषय पर कोई सार्वजनिक या व्यापक विचार-विमर्श नहीं कराया गया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि राज्य सूची से जुड़े विषय में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के साथ ऐसे प्रावधान किस कानूनी आधार पर जोड़े जा रहे हैं।
कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया कि वर्ष 2018 में कांग्रेस सरकार द्वारा तैयार किए गए बेअदबी कानून को आगे बढ़ाने के बजाय वर्तमान सरकार ने ऐसे संशोधन लाने की कोशिश की है, जिससे शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप का रास्ता खुल सकता है। उन्होंने दावा किया कि यह कदम नेहरू-मास्टर तारा सिंह समझौते की भावना के विपरीत है और इससे सिख धार्मिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप की आशंका बढ़ेगी।
श्री सिंह ने कहा कि प्रस्तावित कानून का उद्देश्य वास्तविक दोषियों को सजा देना होना चाहिए था, लेकिन इसके मौजूदा स्वरूप से श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की सेवा-संभाल करने वाले सेवादारों और संरक्षकों के कानूनी दायरे में आने की आशंका पैदा हो गई है। उन्होंने कहा कि 2015 की बेअदबी घटनाओं में शामिल लोग न तो अधिकृत संरक्षक थे और न ही उन्होंने चोरी की थी, बल्कि उन्होंने सुनियोजित साजिश के तहत बेअदबी की थी। ऐसे अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के बजाय सरकार कानून की दिशा बदल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि 2015 के बेअदबी मामलों में भी आज तक दोषियों को सजा नहीं मिल सकी है और आम आदमी पार्टी सरकार न्याय दिलाने में पूरी तरह विफल रही है। इस दौरान उन्होंने अरविंद केजरीवाल का एक पुराना वीडियो भी दिखाया, जिसमें बेअदबी मामलों में दोषियों को सजा दिलाने का दावा किया गया था।
उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर अपने मंत्रियों और विधानसभा अध्यक्ष को सामने लाने के बजाय प्रवक्ताओं के माध्यम से सफाई दे रही है। उन्होंने सवाल किया कि यदि सरकार अपने विधेयक और मंशा को लेकर आश्वस्त है तो संबंधित मंत्री और स्पीकर स्वयं जनता के सामने आकर अपना पक्ष क्यों नहीं रखते। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी बेअदबी के दोषियों को कठोर से कठोर सजा दिए जाने के पक्ष में है, लेकिन ऐसा कोई भी कानून स्वीकार्य नहीं होगा, जिससे वास्तविक अपराधियों के बजाय धार्मिक संस्थाओं और सेवा-संभाल से जुड़े लोगों को कानूनी दायरे में लाने की आशंका पैदा हो। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस विषय पर सभी पक्षों, कानूनी विशेषज्ञों और धार्मिक प्रतिनिधियों से व्यापक चर्चा के बाद ही कोई कानून बनाया जाए।
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