चंडीगढ़ , मार्च 29 -- पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने रविवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान पर आरोप लगाया कि 'दंड प्रक्रिया संहिता (पंजाब संशोधन) विधेयक-2018' को एक नयी कानूनी पहल बताकर 13 अप्रैल को पेश करने का श्रेय लेना जनता को गुमराह करने जैसा है।
श्री रंधावा ने स्पष्ट किया कि यह संशोधन कांग्रेस सरकार के समय 2018 में ही पारित और राजपत्र (गजट) में प्रकाशित हो चुका था।
श्री रंधावा ने दावा किया कि 27 अगस्त 2018 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए विधानसभा में सर्वसम्मति से यह बिल पारित किया था। इसमें श्री गुरु ग्रंथ साहिब, भगवद गीता, कुरान और बाइबिल जैसे पवित्र ग्रंथों की बेअदबी के लिए आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान था।
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने 2021 में स्वयं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर इस संशोधन को लागू करने का मुद्दा उठाया था, जो आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज है।
श्री रंधावा ने कहा कि बैसाखी के अवसर पर विशेष सत्र बुलाकर 'आप' सरकार पुराने कानून को ही दोबारा पेश कर रही है। उन्होंने तंज कसा कि 2026 में इस बिल का संदर्भ देना असल में कांग्रेस के काम को ही स्वीकार करना है।
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