बेंगलुरु , अप्रैल 03 -- कर्नाटक में बेंगलुरु देश के बढ़ते शहरी जल संकट का एक जीता-जागता उदाहरण बन गया है। यह चिंता प्लंबेक्सइंडिया 2026 से पहले चर्चा का मुख्य केंद्र बन गयी है।

जैसे-जैसे देश में पानी का संकट बढ़ता जा रहा है, उद्योग जगत के नेताओं और विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि देश में 2030 तक पानी की मांग उसकी आपूर्ति से कहीं अधिक हो जाएगी। अनुमान बताते हैं कि लगभग 60 करोड़ भारतीय पहले से ही पानी के गंभीर या अत्यधिक संकट का सामना कर रहे हैं, जबकि कई बड़े शहरों में भविष्य में भूजल (जमीन के नीचे का पानी) पूरी तरह खत्म होने का खतरा मंडरा रहा है।

बेंगलुरु में आया यह बदलाव इस चुनौती की गंभीरता को दिखाता है। कभी आपस में जुड़ी हुई झीलों के जाल के लिए मशहूर इस शहर में आज 100 से भी कम जल निकाय (पानी के स्रोत) बचे हैं। इनमें से कई बुरी तरह प्रदूषित हैं या उन पर अवैध कब्जा हो चुका है। अध्ययनों से पता चला है कि इनमें से अधिकतर झीलें 'यूट्रोफिक' (पोषक तत्वों की अधिकता से प्रदूषित) हो चुकी हैं, जिससे उनकी भूजल को रिचार्ज करने और जैव विविधता को बनाये रखने की क्षमता सीमित हो गयी है।

कावेरी नदी पर शहर की बढ़ती निर्भरता, जिससे पानी लंबी दूरी से और बहुत अधिक ऊर्जा खर्च करके पंप किया जाता है, शहरी जल प्रबंधन में मौजूद ढांचागत कमियों और मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ते असंतुलन को उजागर करती है।

इसी पृष्ठभूमि में प्लंबेक्सइंडिया 2026, जो भारत में पानी, स्वच्छता और प्लंबिंग से जुड़ी सबसे बड़ी प्रदर्शनी है, खुद को एक ऐसे महत्वपूर्ण मंच के रूप में पेश कर रहा है, जहां नवाचार, आपसी सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान के जरिए इन चुनौतियों का समाधान तलाशा जाएगा।

इंडियन प्लंबिंग एसोसिएशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में 200 से अधिक प्रदर्शक और 50 से अधिक स्टार्टअप हिस्सा लेंगे। यहां स्मार्ट जल प्रणालियों, स्वच्छता के बुनियादी ढांचे, प्लंबिंग की आधुनिक तकनीकों और टिकाऊ निर्माण पद्धतियों से जुड़े समाधानों को प्रदर्शित किया जाएगा।

इस प्रदर्शनी में 15,000 से अधिक लोगों के शामिल होने की उम्मीद है, जिनमें नीति-निर्माता, इंजीनियर, आर्किटेक्ट और उद्योग जगत के पेशेवर शामिल होंगे।

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