नयी दिल्ली, जुलाई 14 -- बेंगलुरु के शोधकर्ताओं ने एक उन्नत अमोनिया सेंसिंग प्लेटफ़ॉर्म विकसित किया है जो कमरे के तापमान पर काम करते हुए बहुत कम मात्रा में भी हानिकारक अमोनिया गैस का पता लगाने में सक्षम है।

अमोनिया का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर फर्टिलाइज़र बनाने, रेफ्रिजरेशन, केमिकल बनाने और खेती जैसे उद्योगों में किया जाता है। अमोनिया के संपर्क में आने से आँखों, त्वचा और सांस लेने के सिस्टम में गंभीर जलन हो सकती है, जबकि लंबे समय तक संपर्क में रहने से सेहत से जुड़ी गंभीर समस्याएँ हो सकती हैं। इसलिए, कार्यस्थल पर सुरक्षा, पर्यावरण की सुरक्षा और लोगों की सेहत सुनिश्चित करने के लिए अमोनिया की लगातार और भरोसेमंद निगरानी ज़रूरी है।

इस चुनौती से निपटने के लिए, विज्ञान और प्रौद्याेगिकी विभाग के एक स्वायत्त संस्थान, सेंटर फ़ॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज ,बेंगलुरु के शोधकर्ताओं ने हाइब्रिड वैनेडियम ऑक्साइड-वैनेडियम सल्फाइड हेटरोस्ट्रक्चर पर आधारित एक बहुत संवेदनशील गैस सेंसर डिज़ाइन किया है।

इस सेंसर को एक नियंत्रित सतह परिवर्तन प्रक्रिया के ज़रिए बनाया गया था, जो अमोनिया को सोखने के लिए बहुत सारी सक्रिय जगहें बनाती है और साथ ही संवेदी परत के अंदर चार्ज के बहाव को भी बढ़ाती है। यह समावेश सेंसिंग के प्रदर्शन को काफी बेहतर बनाता है, जिससे सामान्य स्थितियों में भी अमोनिया का तेज़ी से और बहुत सटीक तरीके से पता लगाया जा सकता है। इस विकसित किए गए सेंसर ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया और अमोनिया की बहुत कम मात्रा,319 पीपीबी का भी पता लगाया, जो कार्यस्थल के लिए तय सुरक्षा सीमा से काफी कम है। बहुत कम मात्रा का पता लगाने की क्षमता के अलावा, इस सेंसर ने दूसरी आम गैसों के मुकाबले बेहतरीन चयन क्षमता (खास गैस को पहचानने की क्षमता), बार-बार इस्तेमाल के बावजूद काम करने की क्षमता और अलग-अलग मात्राओं में असरदार काम करने की खूबी दिखाई। यह नया उपकरण कमरे के तापमान पर ही अच्छे से काम करता है, जिससे ऊर्जा की खपत कम होती है और इसे लगाना आसान हो जाता है।

प्रो. अंगप्पन सुब्रमण्यम की अगुवाई वाली शोध टीम- जिसमें डॉ. विष्णु जी. नाथ, अंकुर वर्मा, अभिजीत पॉल और डॉ. सुभाष चेरुमन्निल करुमथिल शामिल थे, ने इस सेंसिंग टेक्नोलॉजी को इस्तेमाल के लायक प्रोटोटाइप में बदला। एक पोर्टेबल मॉनिटरिंग सिस्टम बनाया गया जो अमोनिया की मात्रा तय सुरक्षा सीमा से ज़्यादा होने पर तुरंत अलर्ट देता है। यह उपकरण अपने आप पर्यावरण की स्थितियों को सुरक्षित, चेतावनी और खतरे वाले ज़ोन में बांट देता है, जिससे बिना किसी तकनीकी जानकारी के भी तेज़ी से स्थिति को समझा और उस पर कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे सेंसरी उपकरण का इस्तेमाल औद्योगिक इकाइयों, स्टोरेज यूनिट, प्रयोगशालाओं और खेती-बाड़ी वाली जगहों पर किया जा सकता है, जहाँ अमोनिया के रिसाव से बड़ा खतरा हो सकता है।

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