औगाडूगू , अप्रैल 05 -- दक्षिण अफ्रीकी देश बुर्किना फासो के सैन्य शासक इब्राहिम त्रोरे के लोकतंत्र से संबंधित हालिया बयानों ने देश के राजनीतिक भविष्य को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया है कि देश में लंबे समय से प्रतिक्षित चुनाव को अब अनिश्चित काल के लिए टाल दिया गया है।

एक टेलीविजन साक्षात्कार में श्री त्रोरे ने विवादास्पद टिप्पणी करते हुए कहा, "लोकतंत्र हमारे लिए नहीं है।" उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि देश में सैन्य शासन को आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।

गौरतलब है कि इब्राहिम त्रोरे ने 2022 में एक सैन्य तख्तापलट के जरिए बुर्किना फासो की सत्ता संभाली थी। उन्होंने 30 सितंबर 2022 को तत्कालीन अंतरिम राष्ट्रपति लेफ्टिनेंट कर्नल पॉल-हेनरी सांदाओगो दामिबा को पद से हटाकर देश का नेतृत्व अपने हाथों में लिया था। श्री दामिबा ने भी उसी साल जनवरी 2022 में तख्तापलट कर सत्ता हासिल की थी, लेकिन वे देश में बढ़ती जिहादी हिंसा को रोकने में विफल रहे थे, जिसके बाद त्रोरे के नेतृत्व में सेना के एक गुट ने उनका तख्ता पलट दिया था।

चैनल अफ्रीका की रिपोर्टों के अनुसार, बुर्किना फासो हालांकि अभी भी जिहादी हिंसा, राजनीतिक अस्थिरता और मानवाधिकारों के उल्लंघन जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के विशेषज्ञ क्रिस्पिम सेंगा के अनुसार, श्री त्रोरे की हालिया टिप्पणी इस क्षेत्र में आ रहे एक बड़े बदलाव को दर्शाती है। श्री सेंगा ने कहा, "इस तरह के बयान लोकतांत्रिक प्रणालियों से हटकर सुरक्षा-केंद्रित नेतृत्व की ओर बढ़ने का इशारा करते हैं। हालांकि सैन्य शासक तर्क देते हैं कि व्यवस्था बहाल करने के लिए यह जरूरी है, लेकिन यह जवाबदेही और आम नागरिकों की आवाज को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करता है।"दूसरी ओर, श्री त्रोरे का मानना है कि बुर्किना फासो जैसे देशों के लिए पश्चिमी लोकतंत्र एक 'अंधेरा भविष्य' है और विकास का एकमात्र रास्ता 'क्रांति' है। उन्होंने घोषणा की कि जल्द ही एक नया 'क्रांति घोषणापत्र' जारी किया जाएगा, जो देश के भविष्य की रणनीतिक दृष्टि को परिभाषित करेगा।

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