नई दिल्ली , जुलाई 19 -- संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने से एक दिन पहले रविवार को सामाजिक सोनम वांगचुक ने 20 जुलाई को संसद तक प्रस्तावित मार्च को देश का "दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन" बताया।
श्री वांगचुक ने हाथ से लिखा एक संदेश भेजा, जिसे सफदरजंग अस्पताल से उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने शेयर किया। श्री वांगचुक के सोशल मीडिया अकाउंट से एक्स पर शेयर किए गए इस हाथ से लिखे संदेश में कहा गया, "सोनम का संदेश: 20 जुलाई दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन। एक भय-मुक्त भारत, एक अन्याय-मुक्त भारत। अन्याय से आज़ादी (जैसे पेपर लीक)। डर से आज़ादी (मेरी गैर-कानूनी हिरासत)। भारत का दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन।" उन्होंने कहा, "संसद तक मार्च। कृपया इसे सफलता बनाएं।" संदेश में लिखा है, "सफदरजंग में मेरी गैर-कानूनी हिरासत से गीतांजलि के ज़रिए भेजा गया।" कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ( जो शिक्षा में सुधार की मांग कर रही है) ने मॉनसून सत्र की शुरुआत के साथ ही 20 जुलाई को संसद तक मार्च करने की घोषणा की है। सीजेपी छह जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रही है। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) पेपर लीक मामले को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है। प्रदर्शनकारियों के साथ श्री वांगचुक भी शामिल हुए, जिन्होंने 28 जून को विरोध स्थल पर आधिकारिक तौर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे श्री वांगचुक की तबीयत बिगड़ने के बाद शनिवार सुबह उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस बीच, श्री वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने रविवार को सामाजिक कार्यकर्ता की सेहत को लेकर केंद्र की चिंता को "दिखावा" बताया। उन्होंने दावा किया कि सरकार को डर था कि अगर श्री वांगचुक वहां मौजूद रहे, तो नीट-यूजी पेपर लीक के खिलाफ 20 जुलाई को संसद तक होने वाले मार्च में वे शामिल हो सकते हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय ने श्री वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो की उस याचिका पर कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने श्री वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से तुरंत छुट्टी देकर मेदांता अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग की थी। न्यायालय ने कहा कि श्री वांगचुक हिरासत में नहीं हैं और उन्हें सरकारी अस्पताल में शिफ्ट करने के सरकार के फैसले को मनमाना नहीं कहा जा सकता। गीतांजलि आंग्मो ने श्री वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में रखे जाने को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि नीट यूजी पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के दौरान उन्हें जबरन जंतर-मंतर से हटाया गया और उनकी मर्जी के बिना अस्पताल में रखा जा रहा है। दिल्ली उच्च न्यायालय के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए गीतांजलि आंग्मो ने दावा किया कि श्री वांगचुक की सेहत खराब नहीं हो रही थी और उनका पोटैशियम लेवल सरकारी अस्पताल में दर्ज किए गए लेवल से बेहतर था। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले जाने से पहले पुलिसकर्मी श्री वांगचुक के परिवार को जानकारी दे सकते थे।
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