जयपुर , फरवरी 28 -- भारतीय उद्योग व्यापार मण्डल (बीयूवीएम) ने इस बार रंगों के पर्व होली पर स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए देश में निर्मित रंगों तथा गुलाल का व्यापारिक क्रय-विक्रय करने एवं विदेशी गुलाल तथा रंग का क्रय विक्रय नहीं करने का फैसला किया है।
बीयूवीएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता ने बताया कि इसके लिए शनिवार को बीयूवीएम के मुंबई, उत्तरप्रदेश, हिमाचलप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, पंजाब, हरियाणा, तेलंगाना, मध्यप्रदेश आदि राज्यों से पदाधिकारियों ने उनकी अध्यक्षता में आयोजित दूरभाषिक चर्चा में भाग लेकर यह निर्णय किया। श्री गुप्ता ने बताया कि इस दौरान निर्णय किया गया कि विदेशी गुलाल एवं रंग की बिक्री को रोका जाये तथा उपभोक्ता स्वदेशी रंग एवं गुलाल का ही प्रयोग किया जाये क्योंकि विदेशी रंगों एवं गुलाल से होली खेलने पर त्वचा रोग बहुत बढ़ते हैं।
उन्होंने बताया कि होली के पर्व पर गुलाल तथा रंगों का विशेष क्रय-विक्रय होता है। करीब 60 हजार करोड़ का व्यापार गुलाल एवं रंग का देशभर में होता है। इस वर्ष भी विशेषेकर होली के दूसरे दिन पूरा उत्तरी भारत होली के रंगों से सराबोर रहेगा। वृन्दावन की फूलों की होली, बरसाने की लठमार होली, नाथद्वारा की फूलों के रंग की होली, ब्यावर की हाथी पर बैठकर होली मनाने की प्रथा है।
उन्होंने बताया कि बीयूवीएम ने निर्णय किया है कि इस वर्ष स्वदेशी गुलाल जो ज्यादातर टेलकम पाउडर पर बनी हुई है तथा ऑर्गेनिक रंग जो केसुला के फूलों से बना हो, हर गांव-कस्बे में ऑर्गेनिक रंग बनाने का अपना-अपना तरीका अभी भी जीवित है, इसे पुनर्जीवित किया जायें। इस लिए इस बार होली पर विदेशी रंगों एवं गुलाल की बिक्री को रोका जाना चाहिये।
श्री गुप्ता ने कहा कि सभी सदस्यों ने घोर विरोध व्यक्त करते हुए कहा कि विदेशी रंग एवं गुलाल स्वास्थ्य के लिये बहुत घातक है। यह एलर्जी देने वाला है इसे रोका जाना चाहिये। निर्णय लिया गया कि पूरे देश में प्रचारित किया जायें कि देश में निर्मित रंगों तथा गुलाल का व्यापारिक क्रय-विक्रय करें। विदेशी गुलाल तथा रंग का विक्रय रोका जायें तथा उपभोक्ता स्वदेशी रंग एवं गुलाल का ही प्रयोग करें।
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