नयी दिल्ली , मई 20 -- भारत डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर एसोसिएशन (बीडीआईए) ने डिजिटल अर्थव्यवस्था के नये दौर में देश के लिए संप्रभु डिजिटल अवसंरचना पारिस्थितिकी तंत्र के तीव्रता से विस्तार की अवश्यकता पर बल दिया है।
बीडीआईए द्वारा यहां बुधवार को आयोजित - 'भारत डिजिटल संवाद: द फाउंडेशन फोरम' परिचर्चा में नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं, तकनीक विशेषज्ञों और इकोसिस्टम से जुड़े हितधारकों के साथ डिजीटल क्षेत्र में हो रहे बदलावों पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि भारत अब बड़े पैमाने पर डिजिटल सेवाओं का उपयोग करने वाले देश से आगे बढ़कर डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर क्लाउड, कंप्यूट, हार्डवेयर, प्लेटफॉर्म और अहम डेटा सिस्टम को खुद आकार देने और सुरक्षित करने की दिशा में बढ़ रहा है, जो देश की प्रगति को ताकत देती हैं।
चर्चा के नतीजों के रूप में बी-डीआईए ने संबंधित सरकारी हितधारकों को एक व्यापक नीति सिफारिश ढांचा सौंपने की योजना का ऐलान किया, जिसका उद्देश्य भरोसेमंद क्लाउड मानकों, देश में बने डिजिटल उत्पादों के प्रमाणन, संप्रभु एआई ढांचों और भारतीय तकनीक प्रदाताओं के लिए बेहतर बाजार पहुंच के जरिए भारत के संप्रभु डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम को तेज करना है।
बीडीआईए के अध्यक्ष और ईएसडीएस सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन लिमिटेड के प्रमोटर, चेयरमैन और प्रबंध निदेशक, पीयूष सोमानी ने कहा, "भारत अपनी डिजिटल यात्रा के एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। देश ने भले ही डिजिटल अपनाने में दुनिया में अग्रणी स्थान हासिल कर लिया हो, लेकिन विकास के अगले चरण में भारत के भीतर ही तैयार, संचालित और बड़े पैमाने पर विकसित होने वाले संप्रभु और भरोसेमंद डिजिटल ढांचे के निर्माण पर ध्यान देना होगा। जैसे-जैसे एआई, क्लाउड और साइबर सुरक्षा जैसी तकनीकें आर्थिक विकास और राष्ट्रीय मजबूती की बुनियाद बनती जा रही हैं, भारत के लिए जरूरी है कि वह अपनी घरेलू क्षमता को मजबूत करे और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर की अहम परतों में रणनीतिक निर्भरता कम करे।"महासचिव, बीडीआईए अभिषेक भट्ट ने कहा, "यह सम्मेलन उद्योग और नीति से जुड़े लोगों के बीच भारत की डिजिटल संप्रभुता की महत्वाकांक्षाओं के लिए एक मजबूत ढांचा बनाने की बढ़ती जरूरत को दर्शाता है। भारत सिर्फ बड़े पैमाने पर डिजिटल तकनीकों का उपयोग ही न करे, बल्कि अपने डिजिटल भविष्य को आगे बढ़ाने वाले ढांचे का निर्माण खुद करे और स्वामित्व अपने पास रखे।"बीडीआईए एक राष्ट्रीय नीति मंच है जो भारत की संप्रभु डिजिटल ढांचे की महत्वाकांक्षाओं और भरोसेमंद डिजिटल इकोसिस्टम के भविष्य पर केंद्रित है।"एडॉप्शन से कमांड तक: भारत के संप्रभु डिजिटल भविष्य की रूपरेखा" विषय पर हुए इस फोरम में बी-डीआईए के औपचारिक सार्वजनिक शुभारंभ की घोषणा की गयी। यह इस क्षेत्र पर केंद्रित, गैर-लाभकारी उद्योग संगठन है जो संप्रभु डिजिटल ढांचे को आगे बढ़ाने और उद्योग, नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों और रणनीतिक संस्थानों के बीच बेहतर सहयोग को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
उद्योग जगत के दिग्ग्जों ने देश में नवाचार को बढ़ाने, देशी बौद्धिक संपदा तैयार करने और भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता तथा डिजिटल संप्रभुता को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर तालमेल रखने वाले ढांचों जैसे भारत क्लाउड सर्टिफिकेशन (बीसीसी), ट्रस्टेड इंडियन डिजिटल प्रोडक्ट (टीआईडीपी) और डिजिटल सॉवरेंटी मैच्योरिटी मॉडल (डीएसएमएम) के महत्व को रेखांकित किया। फोरम में इस बात पर सहमति बनी कि एक संप्रभु डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर ढांचे की जरूरत है जो विदेशी नियंत्रण वाले डिजिटल इकोसिस्टम पर रणनीतिक निर्भरता कम करे और भारत को एक वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी डिजिटल अर्थव्यवस्था के रूप में उभरने में मदद करे।
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