बीजापुर, फरवरी 20 -- छत्तीसगढ़ में बीजापुर जिले के फरसेगढ़ और तर्रेम थाना क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने अलग-अलग स्थानों पर व्यापक अभियान चलाते हुए माओवादियों द्वारा निर्मित कुल चार अवैध स्मारकों को ध्वस्त कर दिया।
यह कार्रवाई उन क्षेत्रों में की गई है जहाँ माओवादी लंबे समय से अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए इस तरह के प्रतीकात्मक ढाँचे खड़े करते रहे हैं। सुरक्षा बलों द्वारा लगातार चलाए जा रहे इस अभियान का मुख्य उद्देश्य माओवाद के पूर्ण उन्मूलन के साथ ही इलाके में स्थायी शांति, सुरक्षा और विकास की नींव को मजबूत करना है।
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की ओर से शुक्रवार को मिली जानकारी के अनुसार,सबसे बड़ा अभियान एफओबी पील्लूर केरिपु में तैनात 214 वाहिनी के जवानों ने चलाया। इस दौरान नीलमड़गु के जंगलों में गश्त के दौरान जवानों को माओवादियों द्वारा बनाया गया 15 फीट ऊंचा एक विशाल अवैध स्मारक मिला। जंगल के अंदर एकांत स्थान पर बनाए गए इस स्मारक का उपयोग माओवादी अपनी ताकत दिखाने और स्थानीय ग्रामीणों में भय का माहौल बनाने के लिए करते थे। जवानों ने मौके पर ही इस भव्य ढांचे को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया, जिससे क्षेत्र में माओवादियों के प्रतीक चिन्ह को खत्म कर दिया गया।
वहीं, थाना तर्रेम क्षेत्र में केरिपु स्थित 153 वाहिनी के जवानों ने भी अलग-अलग इलाकों में अभियान चलाया। इस अभियान के दौरान पेद्दागेलुर और कोत्तागुड़ा के घने जंगलों में माओवादियों द्वारा निर्मित तीन अलग-अलग अवैध स्मारकों को ढूंढ निकाला गया। ये स्मारक भी काफी बड़े आकार के बनाए गए थे और माओवादी विचारधारा के प्रतीक माने जाते थे। जवानों ने इन तीनों स्मारकों को भी जमींदोज कर दिया और पूरे इलाके को माओवादी प्रतीकों से मुक्त करा दिया।
गौरतलब है कि सुरक्षा बल पूरे बीजापुर जिले में माओवादियों के खिलाफ लगातार अभियान चला रहे हैं। इन अभियानों का मुख्य उद्देश्य माओवादियों के आतंक के प्रतीकों को खत्म करना है। माओवादी अक्सर अपनी मौजूदगी दिखाने और इलाके में अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए जंगलों और दूरदराज के इलाकों में इस तरह के बड़े-बड़े स्मारक बनाते थे। ये स्मारक न सिर्फ कानून के शासन को चुनौती थे, बल्कि आम ग्रामीणों के मन में भय का भी प्रतीक थे। ऐसे में इन्हें ध्वस्त करना सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता मानी जा रही है।
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